बिजली विभाग की उदासीनता के चलते तमाम गांवों में आज भी बांस-बल्ली के सहारे बिजली आपूर्ति हो रही है। सालों पहले लगाए गए लकड़ी के पोलों से तार ले जाए गए हैं। जर्जर पोल कब धराशायी हो जाएं कोई नहीं जानता। यहीं समस्या कोपागंज ब्लाक के कोपाकोहना ग्राम सभा के रेलवे स्टेशन से पूरब दिशा स्थित बस्ती में देखी जा सकती है। जहां ग्रामीण आज भी बांस-बल्ली के सहारे बिजली आपूर्ति की जा रही है।
करीब 100 घरों में बिजली आपूर्ति जगह-जगह बांस बल्ली लगाकर हो रही है। ग्रामीणों द्वारा लगाए बांस के तमाम पोल सड़ चुके हैं, जो कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। पोल पर बिछाए गए तार काफी नीचे आ चुके हैं जिससे राहगीरों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है। अक्सर तारों के उलझे होने की वजह से लोकल फाल्ट की घटनाएं भी होती रहती हैं। जब भी तेज हवा चलती है, राहगीर सहित आसपास के मकान वाले भी सहम जाते हैं। यह गांव तो महज बानगी है क्षेत्र के दर्जनों गांवों में आज भी विभाग इन्हीं जर्जर बांस-बल्ली के पोलों के सहारे आपूर्ति कर रहा है। उपभोक्ताओं से नियत समय पर बिल की वसूली के लिए विभाग अभियान तो चलाता है लेकिन लोगों की समस्याएं निस्तारित करने में कोई दिलचस्पी नहीं लेरहा। इतना ही नहीं कई बार लोगों ने विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग भी की, लेकिन विभाग ने एक न सुनी।
उपभोक्ता धर्मेंद्र, मुन्ना प्रजापति, प्रवीण चौरसिया, सुरेश, रामाशीष आदि ने बताया कि कई बार इन जर्जर पोलों को हटाने की मांग की गई पर ध्यान नहीं दिया गया। कहा कि यह समस्या बीते कई दशकों से बनी हुई है, बावजूद विभागीय अधिकारी इससे अंजान बने हुए है। इस संबंध में एसडीओ जितेंद्र कुमार का कहना है कि इसकी जानकारी उनके संज्ञान में नहीं है। वो जानकारी लेकर बिजली आपूर्ति के लिए पोल की व्यवस्था करवाएंगे।