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शव से लिपट कर रोए परिवार के सदस्यों को हटाया गया किसी तरह से

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चिरैयाकोट। नक्सली हमले में शहीद हुए धर्मेंद्र ने फोन पर बात करने के दौरान अपनी बिटिया संध्या से वादा किया था कि वह 28 अप्रैल को जरूर घर आएगा। लेकिन इससे पूर्व उसके शहीद होने की सूचना परिवार के लोगों को मंगलवार की देर शाम को मिली। बुधवार की शाम को जैसे ही शहीद का शव उसके घर पहुंचा, उसकी विधवा उमा देवी, बुढी मां प्रभावती, पिता खेदन के साथ पुत्र विकास और पुत्रियां संध्या और सोनम के साथ भाई महेंद्र, जितेंद्र तथा बहन शव से लिपटकर रोने लगी। इस दौरान गांव के लोगों के साथ-साथ शव के साथ आए सीआरपीएफ के डीआईजी और अन्य लोग शहीद के परिवारीजन को सांत्वना देकर किसी तरह से शांत कराने का प्रयास करने लगें।
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बताते चले भेड़ियाधर गांव के लाल धर्मेंद्र के शहीद होने की सूचना मंगलवार को ही पूरे क्षेत्र में फैल गई थी। इस दौरान भेड़ियाधर गांव में शहीद के घर शोक प्रकट करने के लिए मंगलवार से ही लोगों के आने जाने का सिलसिला शुरू हो गया था। इस दौरान पुलिस के जवान और प्रशासनिक अधिकारी बुधवार की सुबह ही शहीद के घर पहुंच गए थे। ताकि जो जरूरत पड़े उसे पूरा किया जा सकें। होने वाली भीड़ को देखते हुए गांव से लेकर लिंग मार्ग तक पुलिस के जवानों को लगाया गया था। बुधवार की सुबह छह बजे से शहीद के घर रिश्तेदारों के आने का सिलसिला शुरू हुआ तो दोपहर तक लोगों की भीड़ एकत्र होने लगी थी। 12 बजे तक लगभग एक की भीड़ शहीद के घर पहुंच चुकी थी। इस दौरान शहीद के बारे में लोग बातें करते नजर आए। शाम को शव आने के बाद गांव में करीब दस हजार की भीड़ उमड़ी थी। शव के आते ही लोग दौड़ पड़े । परिवार के लोग दहाड़े मार कर रोने चिल्लाने लगे । दरवाजे पर मौजूद लोगों के आंखों में आंसू भरा हुआ था, कोई भी किसी से कुछ भी कहने योग्य नजर नहीं आ रहा था ।
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