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किसानों की कर्जमाफी

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मऊ। कर्जमाफी योजना के तहत लिए गए फसली ऋण से माफी के लिए किसानों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। इसके लिए किसानों को लेखपालों के यहां चक्कर लगाना पड़ रहा है। चूंकि एक लेखपाल के पास कई कई गांवों के चार्ज हैं, इसलिए भी काफी मशक्कत का सामना किसानों को करना पड़ रहा है।योजना की सक्रियता का हाल यह है कि जिला मुख्यालय स्थित कंट्रोलरूम में ढाई महीने में महज आठ किसानों की शिकायतें पंजीकृत की गई हैं। पहले चरण में 18 हजार किसानों को कर्ज माफी का लाभ दिए जाने का लक्ष्य था लेकिन महज 11 प्रतिशत यानी 4091 किसानों को हय लाभ मिल पाएगा।
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बताते चले जिले में लघु और सीमांत किसानों की कुल संख्या 40397 है। सरकार ने 31 मार्च 2016 से पूर्व लघु और सीमांत किसानों द्वारा लिए गए एक लाख रुपये तक के फसली ऋणों को माफ करने की घोषणा कर रखी है। इसके लिए संबंधित बैंकों से कर्ज लेने वाले किसानों की सूची मंगा ली गई है। अब खेतों के प्रत्येक गाटे के हिस्सेदारों से अलग अलग हिस्सा निकालवाने तथा अपने हिस्से की भूमि का सत्यापन कराने के लिए किसानों को अपने हलके के लेखपाल को खोजना पड़ रहा हैं। चूंकि लेखपालों की संख्या काफी कम है और कई क्षेत्रों में आठ और दस दस गांवों का चार्ज एक ही लेखपाल के पास है। रतनपुरा ब्लाक के राम बदन यादव के पास 16 गांवों का चार्ज है, इसी प्रकार कई ऐसे लेखपाल हैं जिनके पास कई गांवों का कार्यभार है। काम की अधिकता के चलते लेखपाल मुलाकात होने पर भी किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहे हैं। इससे किसानों की उलझनें बढ़ जा रही हैं। क्षेत्र के महेंद्र यादव, मुन्नू पहलवान, रामजी पांडेय, इब्राहिम आदि किसानों का कहना है कि कहीं ऋणमाफी योजना का हाल भी सूखा राहत जैसा न हो जाए।

पंजीकरण कराने वालों को टरकाया
किसान राम प्रकाश कहते हैं कि उनका नाम पात्र किसानों की सूची में नहीं था। लेेखपाल के न सुनने पर वह शिकायत पंजीकृत कराने के लिए जिला कृषि अधिकारी कार्यालय गए लेकिन वहां शिकायत दर्ज करने की बजाए टरका दिया गया। किसान नेता राकेश सिंह कहते हैं कि सत्यापन के नाम पर किसानों से पांच सौ रुपयों की वसूली की जा रही है। किसान नेता देवप्रकाश राय कहते हैं कि किसान कर्जमाफी के नाम पर किसानों का शोषण किया जा रहा है। किसान नेता राम नवल राही कहते हैं कि किसानों को कोई पूछने वाला नहीं है। कंट्रोल रूम केवल दिखावा है।
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पहले चरण में 4901 किसानों का चयन किया गया है। इनके कर्ज की रकम उनके बैंक खातों में सीधे लखनऊ से भेजी जाएगी। बाकी किसानों से आधार वगैर जरूरी कागजात मांगे जा रहे हैं। सत्यापन कराए जा रहे हैं। सत्यप्रकाश श्रीवास्तव , उप कृषि निदेशक
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