मऊ। शासन की तरफ से फरमान जारी किए जाने के बाद भी शत प्रतिशत माध्यमिक विद्यालयों में बायोमेट्रिक सिस्टम और सीसीटीवी नहीं लगाया जा सका है। कई स्कूलों में बायोमेट्रिक मशीन लगी भी है, लेकिन शिक्षकों तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों द्वारा फिंगर फीडिंग न कराए जाने से समस्या आ रही है। विभागीय अधिकारियों ने 60 प्रतिशत स्कूलों में बायोमेट्रिक मशीन और सीसीटीवी लगाए जाने का दावा किया है।
जिले में 14 राजकीय और 67 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय हैं। शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के अनियमित दिनचर्चा पर नकेल कसने के लिए शासन की तरफ से जून माह तक ही बायोमेट्रिक मशीन तथा सीसीटीवी लगाने का फरमान जारी किया गया था। लेकिन अभी तक शत प्रतिशत माध्यमिक विद्यालयों में बायोमेट्रिक मशीन तथा सीसीटीवी नहीं लगाया जा सका है। हालत यह है कि कई माध्यमिक विद्यालयों मेें कार्यरत शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी समय पर विद्यालय नहीं पहुंच रहे हैं। शिक्षकों की अनियमित दिनचर्या से विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। शैक्षिक माहौल को लेकर अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता सताने लगी है। कई विद्यालयों में बायोमेट्रिक मशीन तो लगी है, लेकिन शिक्षकों तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के फिंगर फिडिंग कराने में आनाकानी कर रहे हैं। इस संबंध में बालक बालिका इंटर कालेज काझा के प्रबंधक हरिहर सिंह का कहना है कि शासन के फरमान के तहत कालेज में बायोमेट्रिक मशीन और सीसीटीवी तो लग गया है, लेकिन कुछ शिक्षकों द्वारा फिंगर फीडिंग कराने में सहयोग न करने से समस्या आ रही है। यही स्थिति नदवासराय स्थित सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय का है। यह तो बानगी है। जिला विद्यालय निरीक्षक ने गत पांच अगस्त को औचक निरीक्षण में भदांव इंटर कालेज थलईपुर, सरदार बल्लभ भाई पटेल इंटर कालेज हलधरपुर, केएनपीएस इंटर कालेज चोरपाकला में बायोमेट्रिक मशीन और सीसीटीवी कैमरा लगा नहीं पाया था। इस बाबत जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि अगस्त माह तक का समय दिया गया है। 60 प्रतिशत माध्यमिक विद्यालयों में बायोमेट्रिक मशीन और सीसीटीवी लगाया जा चुका है। फिंगर फीडिंग में सहयोग न करने वाले शिक्षकों तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का वेतन रोक दिया जाएगा। शासनादेश का हर हाल में पालन होगा।