दुबारी के बैइरकंटा में बाढ़ आने के बाद सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जाते लोग।
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दुबारी। घाघरा के जलस्तर में बुधवार को 12 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। जलस्तर में तेजी से हो रही बढोत्तरी के चलते देवारा के 20 से अधिक गांव पानी से घिर गए हैं। आसपास के अन्य गांवों से देवारा का संपर्क कट गया है। प्रशासन की तरफ से बेहतर व्यवस्था न किए जाने से लोग घर गृहस्थी के सामान संग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने लगे हैं। नदी खतरा निशान से 49 सेमी ऊपर बह रही है। लेकिन प्रशासन की तरफ से पर्याप्त नाव की व्यवस्था नहीं की जा सकी है।
24 घंटे में 12 सेमी की रफ्तार से घाघरा का जलस्तर बढ़ने से देवारा इलाके के लोगों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। नदी के 1998 के इतिहास को दुहराने को बेताब नजर आ रही है। मधुबन तहसील के हाहा नाला पर नदी के जलस्तर नजर डाला जाए तो बुधवार को नदी का जलस्तर 66.80 मीटर रहा। जबकि मंगलवार को मंगलवार को 66.68 मीटर रहा। खतरा निशान 66.31 है मीटर है। नदी खतरा निशान से 49 सेमी ऊपर बह रही है। नदी का रौद्र रुप देेख देवारा क्षेत्र के बिंटोलिया, नई बस्ती, जरलहवा, खैरा हरिलाल का पुरा, बईरकंटा पुरा, भगत का पुरा, धूस पुरा, मोलनापुर का बलुआ पुरा, चौहानपुर, बरोहा, कुंवरपुरवा, मनमन पुरवा, चक्की मूसाडोही, भगत का पुरा, विनटोलिया, नई बस्ती, विशुन का पुरा गांव सहित 20 गांवों में पानी भर गया है। गांव में प्रशासन की तरफ से व्यवस्था न रहने से लोग गांव से बाहर सुरक्षित स्थान को जाते देखे गए। बाढ़चौकियों पर कर्मचारियों के गायब रहने से बाढ़पीड़ितों को कोई सहयोग नहीं मिल पा रहा है।
वैकल्पिक व्यवस्था न होने से बाढ़पीड़ितों ने गांव से बाहर सुरक्षित स्थानों पर डेरा डाल दिया है। वहीं देवारा इलाके के गांव जाने वाले सभी संपर्क मार्ग डूब जाने से आसपास के गांवों से कट गए हैं। सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न होने से नष्ट होने के कगार पर है। पशुओं के चारे के लिए लोगों को जान जोखिम में डालकर आना जाना पड़ रहा है। अभी तक न तो प्रशासन की तरफ से पर्याप्त नाव की व्यवस्था ही की जा सकी है और न ही बाढपीड़ितों को राहत सामग्री ही दी जा सकी है।
इस बाबत उपजिलाधिकारी मधुबन लालबाबु दूबे ने बताया कि जिनके घर राशन नहीं होगा उनको राशन दिया जाएगा। नि:शुल्क खाद्यान्न वितरित किया जा रहा है।