मऊ। गत वर्ष कोरोना और लॉकडाउन की वजह से करीब एक साल तक विद्यालयों के बंद रहने से विद्यालयों की छात्र संख्या में 20 से 25 फीसदी की गिरावट आई है। इस वर्ष जब स्कूलों के खुलने से शिक्षा व्यवस्था पटरी पर आ ही रही थी कि कोरोना संक्रमण बढ़ने से एक बार फिर स्कूल, कालेज बंद कर दिए गए। स्थिति यह है कि कुछ प्रतिष्ठित स्कूलों को छोड़ अधिकतर स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों को अभी भी वेतन नहीं मिल पाया है।
जिले में 400 से अधिक वित्त विहीन मान्यता प्राप्त इंटर कालेज, 500 छोटे-बड़े निजी पब्लिक स्कूल हैं। प्रत्येक इंटर कालेज या निजी पब्लिक स्कूल में न्यूनतम 20 शिक्षक या शिक्षणेतर कर्मचारी हैं। इसके अलावा 150 निजी डिग्री कालेज तथा 100 से अधिक निजी आईटीआई स्कूल हैं। लाकडाउन तथा कोरोना संक्रमण के चलते लगभग एक वर्ष तक स्कूल, कालेज बंद रहने से कालेज प्रबंधकों को तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कालेज प्रबंधकों की मानें तो 20 प्रतिशत छात्र बिना फीस दिए अन्यत्र चले गए। 25 से 30 प्रतिशत छात्रों के अभिभावक परेशानी का हवाला देकर फीस जमा नहीं कर रहे हैं। ऐसे में तमाम विद्यालयों के शिक्षकों तथा कर्मचारियों को कम वेतन पर काम करना पड़ रहा है। कई स्कूलों के शिक्षकों को वेतन अभी तक नहीं मिला है। अब नए शिक्षा सत्र के लिए एडमिशन का समय आ रहा था तो एक बार फिर विद्यालय बंद हो गए हैं। आय न होने से विद्यालयों के प्रबंधक बिजली बिल तक नहीं जमा कर पा रहे हैं। छोटे विद्यालयों के प्रबंधकों की मानें तो स्टाफ को वेतन दे पाना मुश्किल साबित हो रहा है। डीजल, पेट्रोल का दाम बढ़ने से बसों का संचालन मुश्किल हो रहा है।
प्रबंधक बोले, सरकार जारी करें आर्थिक पैकेज
आर्थिक संकट से जूझ रहे निजी विद्यालयों के प्रबंधकों ने सरकार से आर्थिक आर्थिक पैकेज देने की मांग की है। सनबीम स्कूल के निदेशक राकेश गर्ग ने कहा कि कोरोना के चलते स्कूलों की अर्थ व्यवस्था प्रभावित हुई है। महंगाई तेजी से बढ़ती जा रही है। आमदनी घटती जा रही है। ऐसे में व्यवस्था चलाना मुश्किल हो रहा है।
अमृत पब्लिक स्कूल के प्रबंधक बीडी सिंह ने कहा कि लंबे समय तक स्कूल कालेज बंद रहने से आर्थिक संकट बढ़ गया है। नए शिक्षा सत्र के लिए प्रवेश चल रहा था कि फिर स्कूल बंद हो गए जिससे संकट गहराने लगा है। सरकार निजी स्कूलों, कालेजों को आर्थिक पैकेज जारी करे।
चंद्रा पब्लिक स्कूल के प्रबंधक विजय पाल ने कहा कि लंबे समय तक स्कूल कालेज बंद रहने से आर्थिक संकट पैदा हो गया है। कर्ज लेकर व्यवस्था चलाई जा रही है। इससे उबारने के लिए सरकार निजी विद्यालयों को आर्थिक पैकेज जारी करे।