घाघरा के जलस्तर बढ़ने की रफ्तार तीसरे दिन शनिवार को भी जारी रहने से कस्बा सहित तटवर्ती इलाकेे के लोगों की धड़कनें बढ़ती ही जा रही है। तटवर्ती इलाके सरहरा गांव के देवारा में कई किसानों की 20 एकड़ कृषि योग्य भूमि नदी में समा समा गई। नदी उपजाऊ भूमि को लीलने के लिए आतुर दिख रही हैै। नदी मेें उपजाऊ भूमि के समा जाने के बाद भी शासन प्रशासन की ओर से कटान रोकने के उपाय तक नहीं किया जा सका है।
घाघरा के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने से उससे होने वाले खतरे को लेकर लोग परेशान हैं। लोग सुरक्षा को लेकर अभी से रणनीति तय करने में जुट गए हैं। दूसरी तरफ तटवर्ती इलाकों के किसानों को धान की फसल नष्ट होने का भय सताने लगा है। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो शनिवार को नदी का जलस्तर में पांच सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। जबकि शुक्रवार को नदी का जलस्तर 69.15 मीटर रिकार्ड किया गया था।
नदी 69.20 मीटर पर बह रही थी। गौरीशंकर घाट पर नदी का खतरा बिंदु 69.90 मीटर आंका गया है। घाघरा के रौद्र रुप धारण करने से जहां नगर का मुक्तिधाम, भारतमाता मंदिर, दुर्गा मंदिर, शाही मस्जिद, डीहबाबा का मंदिर, हनुमान मंदिर तथा लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला को खतरा है। वहीं तटवर्ती इलाकों में रामपुर धनौली, नईबाजार, नौली चिऊटीडाड़, बहादुरपुर, सरया, पतनई, बीवीपुर, ताहिरपुर, गौरीडीह, चौराडीह, जमीरा, कोरौली, बेलौली, पाउस, चंद्राबारी, महुआबारी, रसूलपुर आदि इलाकों में घाघरा के तबाही मचाने का खतरा मंडराने लगा है।
देवारा इलाके के सरहरा गांव धनराज, लल्लन, नंदू, चन्नर, विनोद, लालचंद आदि किसानों की 20 एकड़ भूमि घाघरा में समा गई। कटान पीड़ितों का कहना था कि प्रशासन द्वारा बचाव की कवायद शुरू नहीं की गई तो हम लोग एक बार फिर चक्काजाम करने को बाध्य हो जाएंगे।