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Mau News: 20 साल में मनरेगा से कराए 1.96 लाख विकास काम, फिर भी नहीं बदली गांवों की तस्वीर

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कोपागंज ब्लॉक के शाहपुर स्थित मनरेगा खेल मैदान में टूटे झूले और उगी झाड़ियां। संवाद
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20 साल में मनरेगा से 1 लाख 96 हजार 554 विकास कार्य कराए गए। बावजूद इसके जिले के अधिकांश गांवों की तस्वीर नहीं बदली है। मनरेगा अब वीबी जी राम जी हो गया है लेकिन अब भी जिले में मनरेगा से शुरू 8292 विकास कार्य अधूरे पड़े हैं।
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जो पूरे भी हुए, वे देखरेख के अभाव में बदहाली के कगार पर हैं। रानीपुर में 1592 कार्य मनरेगा से अधूरे हैं। पूरे जनपद में लगभग 700 ऐसे कार्य हैं, जिन पर पूरी राशि का 30 फीसदी या उससे कम खर्च हुआ है।
अब उनका पंचनामा बनाकर उन्हें बंद कर दिया जाएगा। इन कार्यों को बंद करने के लिए जिला स्तरीय समिति की सहमति लेनी होगी। ब्लॉक स्तर पर ग्रामीणों के साथ बैठक कर पांच लोगों की सहमति लेकर कागजात तैयार किए जा रहे हैं।
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मनरेगा से वर्ष 2006 से कच्चे-पक्के कार्य कराए जा रहे हैं। 645 ग्राम पंचायतों में हर साल मनरेगा से 90 से 95 करोड़ रुपये मैटेरियल और मजदूरी के भुगतान में खर्च होते हैं।
इस हिसाब से वर्ष 2016 से 2025 तक 10 साल में लगभग 950 करोड़ रुपये खर्च दिखाया गया है। इसमें मजदूरी, कच्चे माल का भुगतान आदि शामिल है।
अभी वर्ष 2024-25 का 10 करोड़ रुपये और वर्ष 2025-26 का 46 करोड़ रुपये भुगतान बाकी है। 9 ब्लॉक वाले जिले में केवल एक विभाग से इतना सरकारी खजाना खर्च हुआ, लेकिन गांवों की तस्वीर नहीं बदली है।
सभी गांवों में लाखों रुपये की लागत से अमृत सरोवर बनाए गए, जो महज मजाक बनकर रह गए। स्टीमेट के अनुसार 20 फीसदी जगहों पर कार्य कराए गए हैं, जो जिले के लिए नजीर साबित हुए। केवल गोठा खेल मैदान के अलावा किसी की हालत ठीक नहीं है।
कोपागंज ब्लॉक का शाहपुर खेल मैदान, फतहपुर मंडाव ब्लॉक का पहाड़ीपुर खिरिया खेल मैदान, रानीपुर में फतेहपुर गांव का खेल मैदान बनाने के बाद प्रधान और विभागीय अधिकारी भूल गए। यहां लगाए गए झूले, चहारदीवारी सब टूट गए हैं।
स्थिति यह है कि कोई उस ओर देखना नहीं चाहता, क्योंकि अंदर झाड़ियों का डेरा है। इसी तरह कोपागंज, रानीपुर, बड़रांव, दोहरीघाट, मुहम्मदाबाद गोहना, रतनपुरा, फतहपुर मंडाव ब्लॉक में आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों का निर्माण अधूरा पड़ा है।
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खंतिया ग्राम पंचायत में मनरेगा में लाखों का खेल
अमिला। बड़रांव ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत खंतिया में मनरेगा से कराए गए विकास कार्यों में तालाब की खोदाई, सार्वजनिक शौचालय और पंचायत भवन के कायाकल्प पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन धरातल पर विकास कार्यों की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है। ग्रामीणों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025 में गाटा संख्या-92 (घ) के लगभग 33 बिस्वा तालाब की खोदाई के नाम पर मनरेगा से लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया। मौके पर तालाब की केवल साफ-सफाई कराई गई। वर्ष 2021-22 में पंचायत भवन के कायाकल्प के नाम पर लगभग चार लाख रुपये खर्च किए गए, लेकिन भवन आज भी जर्जर और बदहाल स्थिति में है। भवन की हालत देखकर खर्च किए गए धन पर सवाल उठ रहे हैं। संवाद
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गांव में मनरेगा के नाम पर हर साल पैसा खर्च होता है। लेकिन अधिकांश कार्य कागजों पर ही कराए गए हैं। गांव की जो तस्वीर 10 साल पहले थी, वैसे ही आज भी है। कुछ कार्य कराए भी गए तो समय से पहले ही बदहाली की स्थिति में पहुंच गए हैं। -नीरज राय, खिदिरपुर
गांव की कुछ पोखरियां ऐसी हैं, जिनकी खोदाई के लिए हर साल मजदूरी ली गई है। दिल्ली और मुंबई में काम करने वाले लोगों के खाते में भुगतान कराया गया। गांव में आरसीसी भी बनी थी, लेकिन कुछ साल में ही फटने लगी है। -जितेंद्र राजभर,
गांव में रास्ता और जल निकासी की व्यवस्था जो 10 साल पहले थी, वही अब भी है। कई मोहल्ले ऐसे हैं, जहां बरसात के समय आवागमन दूभर हो जाता है। कीचड़ और जमा पानी पहचान बन जाते हैं। -दीपू यादव, भैरोपुर खुर्मा
कोट-
वर्तमान में लगभग 56 करोड़ रुपये मनरेगा से कराए गए पुराने कार्यों का भुगतान बाकी है। बीते 27 जून को 15 करोड़ रुपये मिला था, जिसमें से कुछ प्रमुख कार्यों का भुगतान कर दिया गया है। शुरू से अब तक लगभग 700 कार्य ऐसे हैं, जिन पर 30 फीसदी या उससे कम बजट खर्च हुआ था, उसे बंद करने की तैयारी चल रही है। वीबी जी राम जी के तहत चार भागों में बांटकर कार्य कराए जाएंगे। -राजीव कुमार, डीसी मनरेगा, मऊ
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