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गेहूं के संशोधित बीजों का टोटा

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मऊ। जिले के किसी भी केंद्र पर आठ दिनों से गेहूं का बीज नहीं है। इस समय गेहूं की बुआई का मुख्य समय चल रहा है। किसानों को मजबूरी में बाजार से महंगी दरों पर गेहूं के बीज खरीदना पड़ रहा है। किसान बाजार के बीजों की गुणवत्ता पर पूरी रतह भरोसा नहीं कर पाते हैं। जिले के राजकीय बीज भंडारों, एग्रो केंद्रों, साधन सहकारी समितियों तथा एग्री जंक की दुकानों पर बीज रहता तो किसानों को 60 से लेकर 75 फीसदी तथा प्रदर्शन के गेहूं पर 100 प्रतिशत का लाभ डीबीटी के द्वारा गेहूं के मूल्य में सीधे किसानों को लाभ मिलता। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार गेहूं की बुवाई का सबसे उपयुुक्त समय 15 नवंबर से 15 दिसंबर तक रहता है। लेकिन जिले में कृषि विभाग के पास इस समय में गेहूं के बीज न होना अधिकारियों की अकर्मण्यता दिखाता है।
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किसान नेता राकेश सिंह और देवेंद्र सिंह ने जिलाधिकारी से मांग की है कि कृषि विभाग के केंद्रों पर तत्काल गेहूं के बीज मंगाकर किसानों को उपलब्ध कराया जाय। जिससे किसान अपनी उपज को लाभकारी बना सके। किसान नेताओं ने कहा है कि दो वर्ष पूर्व जिले में कृषि विभाग की ओर से 16 हजार कुंतल गेहूं का बीज वितरित किया जाता था। लेकिन वर्तमान में गेहूं बीज का लक्ष्य आधा कर दिया गया है। किसानों को समझ नहीं आ रहा है कि ऐसा क्यों किया गया। किसान नेताओं का कहना है कि बाजार के दुकानदारों को फायदा पहुंचाने के लिये जिले में गेहूं के बीज कृषि विभाग नहीं मंगा रहा है। किसान नेताओं ने एचडी 2967 तथा 3068 गेहूं का बीज राजकीय बीज भंडारों सहित सभी सरकारी बिक्री केंद्रों पर उपलब्ध कराने की मांग की है। इस बाबत जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार का कहना है कि अधिकांश किसानों ने गेहूं के बीज ले लिए हैं। कुछ और प्रजातियों के बीजों के आर्डर दिए गए हैं।
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