मऊ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर एक मुहम्मद गजाली ने बुधवार को हत्या और हत्या के प्रयास के तीस वर्ष पुराने क्रास केस के मामले में सुनवाई के बाद 13 लोगों को दोषी पाया। साथ ही आरोपियों पर सजा का निर्धारण किया। इसमें से एक पक्ष के छह लोगों को आजीवन कारावास की सजा के साथ ही कुल 50- 50 हजार रुपया अर्थदंड की सजा के सुनाई गई। वही दूसरे पक्ष के सात लोगों को हत्या के प्रयास में दस-दस वर्ष का सश्रम कारावास के साथ ही कुल 25-25 हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। अर्थदंड की राशि जमा हो जाने पर मृतक श्यामसुंदर के वारिसों को आधा रुपया देने का आदेश दिया।
कोर्ट ने दो आरोपियों के नाबालिक होने पर उनकी पत्रावली को अलग कर दिया। ट्रायल के दौरान दौरान दोनों तरफ से आरोपित छह लोगों की मौत हो जाने के चलते उनके विरुद्य मुकदमें की कार्यवाही समाप्त कर दी गई। मधुबन थाना क्षेत्र के धर्मपुर कसायर कैथैली गांव निवासी लालचंद पुत्र सुखनंदन ने थाने में हत्या और हत्या का प्रयास की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए गांव के पुनवासी, सखरज, शंकर, बृजभान, अलगू, रामबचन, बाबूराम, बाबूलाल, पूजन, रामविलास, धर्मदेव और इंद्रासन को आरोपी बनाया गया। वही दूसरे पक्ष से रामबचन पुत्र अलगू ने भी हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कराकर झूरी, चंद्रदेव, रामबदन, रामअधार, कैलाश, सुभाष, बिजुली, लालचंद और नारायण को नामजद किया गया।
दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर पुरानी रंजिश और जमीन के विवाद को लेकर 26 सितंबर 1988 को एक दूसरे पर हमला करने का आरोप लगाया। इसमें लालचंद्र के तरफ से श्यामसुंदर, रामबदन, कैलाश और नारायण घायल हुए थे। बाद में श्यामसुंदर की मौत हो गई। वही दूसरे पक्ष रामबचन की तरफ से अलगू, सखरज और शंकर घायल हुए। पुलिस ने दोनों पक्षों की दर्ज रिपोर्ट पर विवेचना कर आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की तरफ से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी नंदलाल ने एक पक्ष से आठ और दूसरे पक्ष से छह गवाहों को पेश कर अपने पक्षों को रखा। जबकि बचाव पक्ष से क्रास केस का हवाला देते हुए झूठा फंसाए जाने की बात कही गई।
एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्को को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद एक पक्ष के शंकर, रामबचन, बाबूलाल, पूजन, रामविलास और इंद्रासन को हत्या , हत्या का प्रयास और बलवा तथा मारपीट का दोषी पाया। इन सभी को हत्या के मामले में आजीवन कारावास के साथ-साथ ही 50-50 हजार रुपया अर्थदंड, हत्या के प्रयास में दस-दस वर्ष के सश्रम कारावास की सजा के साथ ही 25-25 हजार रुपया अर्थदंड, बलवा में दो-दो वर्ष की सजा के साथ ही 15-15 हजार रुपया अर्थदंड तथा मारपीट के मामले में एक-एक वर्ष की सजा के साथ ही 500-500 रुपया अर्थदंड की सजा निर्धारित किया। वही दूसरे पक्ष के झूरी, रामबदन, रामअधार, नारायण, कैलाश, सुभाष और लालचंद को हत्या का प्रयास और बलवा का दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद हत्या के प्रयास में दस-दस वर्ष की सजा के साथ ही 25-25 हजार रुपया अर्थदंड , बलवा की धारा 147 और 148 भादवि में क्रमश: दो-दो और तीन-तीन वर्ष की सजा के साथ ही क्रमश: दस-दस हजार और पांच-पांच हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। अर्थदंड न देने पर एक - एक वर्ष तथा छह-छह माह का अतरिक्त कारावास भुगतना होगा। आरोपीगण पुनवासी, सखरज, अलगू, धर्मदेव, चंद्रदेव, विजुली की मौत हो जाने के चलते उनके विरुद्व मुकदमें की कार्यवाही समाप्त कर दी गई। वही बृजभान और बाबूराम के नाबालिक होने के चलते पत्रावली अलग कर दी गई।