मऊ। सरकार की तरफ से किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए तमाम कवायद विभागीय उदासीनता के चलते बेअसर साबित हो रही है। विभाग की तरफ से तीन ब्लाकों के तीन गांवों में किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए लाखों की लागत से वर्षो पूर्व मिनी मंडी की स्थापना कराई गई। दुकानों का आवंटन तो कर दिया, लेकिन अधिकांश मंडियों पर खरीद बिक्री अभी तक शुरू नहीं हो सका। सब कुछ जानकर विभागीय अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
जिले में धान, गेहूं, गन्ना, सब्जी, फल सहित विभिन्न फसलों की खेती की जाती है। हाड़तोड़ मेहनत करने के बाद भी किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। सरकार की तरफ से किसानों के फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए जिला मुख्यालय के भुजौटी में कृषि मंडी की स्थापना की गई है। यहां मंडी का संचालन तो हो रहा है। लेकिन योजना का व्यापक पैमाने पर प्रचार प्रसार न होने से किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। अधिकारियों की मानें तो भुजौटी स्थित कृषि मंडी से लगभग 500 सब्जी उत्पादक किसान लाभ उठा रहे हैं।इसके अलावा मंडी समिति की तरफ से वर्षो पूर्व लाखों की लागत से कोपागंज ब्लाक क्षेत्र के लैरोदोनवार, परदहां ब्लाक क्षेत्र के डुमरांव, ताजोपुर, रतनपुरा ब्लाक के पहदेवाजीत गांव में मिनी मंडी की स्थापना की गई। यहां टिनशेड, चबूतरा समेत कई सुविधाएं उपलब्ध कराने में मंडी समिति पर लाखों रुपये खर्च किए गए। लेकिन लंबे समय बाद भी अफसरों की लापरवाही के चलते मंडियां संचालित नहीं हो सकी है। हालत यह है कि ये छुट्टा पशुओं और अराजकतत्वों का अड्डा बन गया है। विभाग की तरफ से मिनी मंडी में बनी दुकानों का आवंटन भी कर दिया गया है। दुकानदारों, व्यापारियों द्वारा प्रतिमाह किराया भी जमा कराया जा रहा है। लेकिन विभागीय अधिकारी मंडी को चालू कराने मेें रुचि नहीं ले रहे हैं। इस बाबत मंडी समिति के सचिव विजय बहादुर दुबे का कहना है कि किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए मंडी समितियों को शीघ्र ही चालू करा दिया जाएगा।
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मंडी समिति से देश में कहीं भी बिक्री संभव
मऊ। किसानों की आय दोगुनी करने की केंद्र की पहल के साथ प्रदेश सरकार ने भी प्रयास शुरू कर दिया है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से मंडी समितियों के माध्यम से किसान पूरे देश में कहीं भी अपना फल, सब्जी, अनाज आदि बेच सकता है। जरूरतमंद किसान को तहसीलदार से अनुमति प्राप्त कर मंडी समिति में खतौनी आदि देकर पंजीकरण कराना होगा।
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क्या कहते हैं किसान
उठने लगी है मिनी मंडी को चालू कराने की मांग
बढुआगोदाम। किसानों को हाड़तोड़ मेहनत करने के बाद भी किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। ताजोपुर, डुमरांव के साथ रतनपुरा ब्लाक में पहदेवा जीत गांव में लाखों रुपये की की लागत से मंडी की स्थापना तो की गई। लेकिन मंडी का संचालन न होने से लोग गुस्से में हैं।इस संबंध में डुमरांव गांव के किसान बालरुप यादव, बहरीपुर के नागेंद्र राजभर का कहना है कि मिनी मंडी बने चार वर्ष बीत गया, लेकिन अभी तक चालू नहीं कराया गया।आला अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं हो सका है। इसी तरह किसान डुमरांव के शैैलेेश पांडेय, ताजोपुर गांव के बागीश कुमार का कहना है कि मेहनत की कमाई की फसल को औने पौने दाम में बेचना पड़ता है। मिनी मंडी की सुविधा होने के बाद भी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मिनी मंडी को अविलंब चालू कराया जाए।