मऊ। केंद्र सरकार की तरफ से स्कूली बच्चों को ऑनलाइन पोर्न वीडियो देखने से निजात दिलाए जाने के मामले में सीबीएसई बोर्ड से स्कूलों के आसपास जैमर लगाए जाने का निर्देश जारी करने को कहा गया था, लेकिन एक हफ्ते बाद भी जिले के स्कूलों में अभी तक सीबीएसई की गाइडलाइन नहीं मिली है। स्कूल प्रधानाचार्यो का कहना है कि कालेज कैंपस में बच्चों पर कड़ी निगरानी रखी जाती है।
जिले में सीबीएसई से संबद्ध एक दर्जन विद्यालय संचालित हैं। स्कूली छात्रों में ऑनलाइन पोर्न वीडियो देखने की लत बढ़ती जा रही है। इसके चलते बच्चे मानसिक रूप से बीमार हो रहे हैं। इंटरनेट पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सीबीएसई से स्कूलों को जैमर लगाने का निर्देश देने के लिए फरमान जारी किया गया था। लेकिन अभी तक कालेजों में सीबीएसई का गाइडलाइन ही नहीं मिली है। प्रधानाचार्यो की मानें तो विद्यालय कैंपस में मोबाइल ले जाने की सख्त मनाही है। स्कूल कैंपस में भी छात्रों पर कड़ी निगरानी रखी जाती है। वहीं कई प्रधानाचार्यों का कहना है कि स्कूल कैंपस में जैमर लगने की स्थिति में समस्या भी आ सकती है।
इस संबंध में केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य बी राम का कहना है कि छात्र छात्राओं को मोबाइल लाना वर्जित किया गया है। अभिभावकों को भी निर्देश दिया गया है। अनावश्यक वेबसाइटों को ब्लाक किया गया है। बच्चों पर कड़ी निगरानी रखी जाती है। अभी तक इस मामले में सीबीएसई का निर्देश नहीं मिला है। बताया कि स्कूल कैंपस में जैमर लगने की स्थिति में समस्या आ सकती है। क्योंकि कालेज में अधिकांश शैक्षणिक कार्य ऑनलाइन हो रहे हैं। जैमर के चलते मुश्किलें आ सकती हैं। इसी क्रम में अमृत पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या डॉ. माया सिंह का कहना है कि स्कूली छात्रों में ऑनलाइन पोर्न वीडियो देखने से समस्या आती है। वैसे स्कूल कैंपस में बच्चों को मोबाइल लाने पर पाबंदी लगाई गई है। विद्यालय में प्रवेश करने पर कड़ी चेकिंग की जाती है। सीसी कैमरों के माध्यम से नजर रखी जाती है। लेकिन अभिभावकों को भी घर पर बच्चों की गतिविधि पर नजर रखना चाहिए। वैसे सीबीएसई का निर्देश नहीं मिला है। पिपरी क्षेत्र के अभिभावक मनोज कुमार, रविंद्र वर्मा का कहना था कि इंटरनेट कानून के अभाव में पोर्न वीडियो को बढ़ावा मिल रहा है। बाजार में इस तरह के काफी वीडियो उपलब्ध हैं और इंटरनेट से सीधे सीडी में इनको डाउनलोड किया जा सकता है। आसान पहुंच में होने के कारण बच्चों के दिमाग पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। सख्त कानून बनाया जाना चाहिए। सीबीएसई को सख्त गाइडलाइन जारी करनी चाहिए।