जिले में पिछले 19 माह में 19 बच्चे गायब हो गए। काफी प्रयास के बाद महज सात बच्चे तो किसी प्रकार मिले लेकिन शेष 12 की अभी भी पुलिस को तलाश है। परिवारीजन शासन प्रशासन में गुहार लगाकर थक चुके हैं, लेकिन इन बच्चों का पता नहीं लग सका है।
बकौल पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सिंह, गुमशुदा बच्चों की तलाश के लिए जिले में आपरेशन स्माइल अभियान चलाया जा रहा है। सेल किसी बच्चे के गुमशुदा होने पर रोडवेज, झोपड़पट्टी, रेलवे स्टेशन आदि स्थानों पर उसके जाकर एक अभियान के तहत खोजने का प्रयास करती है। लेकिन इतने बच्चों का नहीं मिलना इस आपरेशन पर सवार खड़ी करती है।
आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2012 में 15 बच्चे लापता हुए। वर्ष 2014 में 13 बच्चों के गायब होने की सूचना दर्ज हैं। वर्ष 2014 में लापता 13 बच्चों में पांच तो काफी प्रयास के बाद मिल गए, लेकिन अब भी आठ बच्चों का पता नहीं लगा सका है। वर्ष 2015 में अब तक छह बच्चे लापता हो चुके हैं।
इनमें से महज दो का ही पता लग सका है। इस प्रकार पिछले 19 माह में 19 बच्चे लापता हो चुके हैं। गुमशुदा बच्चों की तलाश में पुलिस के साथ ही कुछ सामाजिक संस्थाएं भी लगी हैं। सामाजिक संस्थाओं का कहना है कि यूपी में सबसे अधिक बच्चों के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज हैं।
इससे यह साबित हो रहा है कि बाल तस्कर बच्चों को कहीं न कहीं अपना निशाना बना रहे हैं। अभी हाल में ही मुगलसराय में एक रैकेट पकड़ा भी गया है।
चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की सदस्य बबिता कहती हैं कि लापता बच्चों के मामले में पुलिस त्वरित कार्रवाई नहीं करती है।
पहले गुमशुदगी की रिपोर्ट सामान्य ढंग से दर्ज कर ती है। इसके कुछ दिन बाद उसे अपहरण के मामले में तब्दील करने के बाद पुलिस जब तक सक्रिय होती है, तब तक तस्कर बच्चों का अपहरण कर अपने मकसद में सफल हो जाते हैं। कहा कि त्वरित कार्रवाई से बच्चों के गायब होने पर अधिक सफलता पुलिस को मिल सकती है।
फिलहाल पुलिस बाल तस्करों के गिरोह तक पहुंचने में विफल साबित हो रही है। जनपद के लापता बच्चों के न मिलने को लेकर उनकी संस्था भी उनके तलाश के लिए कार्य कर रही है।
बताया कि नियमत किसी भी बच्चे के गायब होने की खबर मिलते ही पूरे जनपद की पुलिस के साथ ही आस पास के जनपद की पुलिस को उसके हुलिया के साथ वायरलेस पर प्रसारण कराना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो पाता है। गुमशुदा बच्चों की रिपोर्ट को प्रतिदिन महिला कल्याण निदेशालय के साथ ही चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को भी देना चाहिए।