मऊ। मानव विकास एवं उसके इतिहास को जानने तथा उसे सिलसिलेवार संरक्षित रखने के लिए काल गणना का विशेष महत्व है। विभिन्न सभ्यता एवं संस्कृतियों ने अपने काल गणना एवं तिथि प्रस्तुत किया है। भारतीय कलेंडर बुद्धाब्द भी इसी तरह की प्रस्तुति है। उक्त बातें डॉ. रामविलास भारती ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर भारतीय कलेंडर बुद्धाब्द 2564 आंबेडकर सन 128 का विमोचन करते हुए प्रेस वार्ता में कही।
यह कलेंडर डॉ. रामविलास भारती द्वारा परिकल्पित एवं निर्मित है। डॉ. रामविलास भारती पत्रकार वार्ता में कहा कि यह ऐसा कलेंडर है, जो पूरी तरह से समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व, मानवीय, तार्किक, वैज्ञानिक एवं खगोलीय घटनाओं पर आधारित है। इस कलेंडर के अनुसार, कोई भी दिन, महीना, पहर अशुभ अथवा शुभ नहीं होता है। कोई भी संस्कार आवश्यकता, उपलब्धता, व्यक्तिगत एवं सर्वसम्मति से किया जा सकता है। इसके अनुसार, मूल भारतीयों का नया साल डॉ. आंबेडकर के जन्मदिन (14 अप्रैल) अर्थात आंबेडकर महीने के एक तारीख से शुरू होता है। इसी दिन को इस संस्कृति को मानने वाले एक दूसरे को भारतीय नववर्ष की मंगलकामनाएं देते हैं। अपने सभी संस्कार बुद्धाब्द आंबेडकर सन के कलेंडर से करते हैं। इस कलेंडर में हिंदू, इस्लाम, ईसाई और बौद्ध धम्म की तिथियों को देखा जा सकता है। इस कलेंडर का निर्माण एक मानवतावादी सांस्कृतिक पहल है, जो दिनचर्या का आधार और नई जीवन शैली विकसित करने एवं स्वस्थ समाज के निर्माण में सम्यक भूमिका निभाएगा। इस मौके पर तेजभान, मनोज कुमार, सुनील कुमार, राकेश यादव, शिवकुमार प्रियदर्शी, गोपाल, बावू राम, सुभाष चंद, हरिंद्र प्रसाद आदि उपस्थित रहे।