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नगदी की जब्ती से व्यापारियों में असंतोष

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मऊ। चुनाव आयोग की आचार संहिता के दिशानिर्देश के अनुसार 50 हजार रुपये से अधिक नगदी लेकर आने-जाने पर रोक है। निर्वाचन अधिकारी के निर्देश पर जनपद में गठित उड़नदस्तों की ओर से नगदी की जब्ती की जा रही है। इससे व्यपारियों में असंतोष है। व्यापारियों ने इस रकम की सीमा को कम से कम एक लाख तक करने की मांग की है। व्यापारियों का मानना है कि बढ़ी महंगाई के इस दौर में 50 हजार की रकम कोई मायने नहीं रखती। इसे लेकर छोटे व्यापारियों को अपने व्यवसाय में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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विगत 12 दिनों में साढ़े तेरह लाख की नगदी उड़नदस्तों द्वारा जब्त की गई है। ये सारी रकम व्यापारियों की है। चूंकि इन दिनों वित्तीय वर्ष की समाप्ति का दौर चल रहा था इसलिए व्यापारियों की ओर से मार्च क्लोजिंग के तहत बकाया वसूली जोरों पर की जा रही है। शहर के बड़े टिंबर कारोबारी मकबूल कहते हैं कि चुनाव आयोग की गाइड लाइन तो उचित है। लेकिन मंहगाई के इस दौर में 50 हजार की रकम व्यापारियों के लिए काफी कम है। उड़नदस्तों को व्यापारियों के साथ नरमी बरतनी चाहिए। लोहा कारोबारी अनिल बर्नवाल कहते हैं कि आयोग की गाइड लाइन के चलते छोटे कारोबारियों के यहां बकाया इस मार्च के अंतिम सप्ताह में वसूला नहीं जा सका है। छोटे काराबारी आचार संहिता की गाइड लाइन का हवाला देकर पल्ला झाड़ ले रहे हैं। इसी प्रकार चाय का थोक कारोबार करने वाले जय प्रकाश का कहना है कि उड़नदस्तों के पकड़े जाने का डर दिखाकर छोटे दुकानदार बकाया का भुगतान नहीं कर रहे। हालांकि इस बाबत एडीएम डीपीपाल का कहना है कि व्यापारी यदि संबंधित रकम के अपेक्षित कागजात साथ लेकर चलें और उड़नदस्तों के मांगने पर उसे दिखाएं तो उनकी रकम को जब्त नहीं किया जाएगा। उधर उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष उमाशंकर ओमर का कहना है कि आयोग की गाइडलाइन तो मान्य ही है लेकिन मंहगाई को देखते हुए आयोग को इस रकम की सीमा को बढ़ाना चाहिए। उन्होंने व्यापारियों का आह्वान किया कि वे रकम से संबंधित कागजात साथ लेकर चलें और उड़नदस्ता प्रभारियों के मांगने पर उसे दिखाएं।
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