फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संगत चंदन का वृक्ष है, संत इस पेड़ की छाया: महात्मा रामप्यारे

विज्ञापन
विज्ञापन
वलीदपुर। संत निरंकारी सत्संग भवन नाजोपट्टी में रविवार को सप्ताहिक संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में महात्मा रामप्यारे ने उपस्थित भक्तों को परमात्मा की महत्ता पर प्रकाश डाला।
विज्ञापन

संत सम्मेलन में प्रवचन देते हुए महात्मा रामप्यारे ने कहा कि संगत चंदन का वृक्ष है और संत इस पेड़ की छाया है। कहा कि जब संतों का उस निरंकार परमात्मा पर पूरा विश्वास हो जाता है तो परमात्मा उनकी हर जगह सहायता करता है। निराकार परमात्मा कण-कण में विराजमान है। उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह द्रोपदी ने कृष्ण भगवान को सहायता के लिए पुकारा था तो भगवान उनकी सहायता के लिए पहुंचे थे, ठीक उसी तरह परमात्मा अपने एक सच्चे भक्त के हर मुश्किल समय में हमेशा उसके साथ खड़े होते हैं।
कहा कि सत्संग पर अमल करना भी आवश्यक है परमात्मा तो हर जगह मौजूद है लेकिन पूर्ण ज्ञान नहीं होने के कारण वह हर इंसान को नजर नहीं आते है। ज्ञान के साथ ही हमें कर्म को भी आगे रखना होगा तभी हम उस परमपिता परमात्मा के दर्शन कर सकते हैं। इसलिए हम मानव को एक सच्चे गुरु की शरण में जाना चाहिए, क्योंकि गुरु वह शक्ति है जो हमें उस निरंकार परम तक पहुंचने का मार्ग दिखाता है। बिना गुरु के परमात्मा का दीदार और संभव है। इस अवसर पर महात्मा सत्य प्रकाश मुखी, लालू, सुदर्शन प्रसाद, रामाश्रय, कलावती, निर्मला, कंचन, सुभावती, फूलमती, कविता, प्यारी देवी, गीता आदि श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे ।
विज्ञापन
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें