मऊ। राशन की कालाबाजारी रोकने के लिए शहरी क्षेत्रों की तरह ग्रामीण क्षेत्रों में इलेक्ट्रानिक प्वाइंट ऑफ सेल (ई-पॉस) मशीन सभी 827 कोटे की दुकानदारों को दे दी गई है। नवंबर महीने से इस महीने से खाद्यान्न वितरण शुरु किया जाएगा। मशीनें देर से आने के कारण चालू माह से इसका इस्तेमाल नहीं किया गया।
जिले में कुल 1087 कोटे की द़ुकानों पर कुल करीब चार लाख 35 हजार कार्ड धारक हैं। इसमें बीपीएल के 56 हजार शेष तीन लाख 79 हजार पात्र गृहस्थी के कार्ड धारक शामिल है। पूर्ति विभाग ने शहरी क्षेत्रों में 260 ई पास मशीनों के माध्यम से खाद्यान्न वितरण शुरु करा दिया था। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी पहले की ही तरह पुरानी पद्धति अनाज का वितरण हो रहा है। जिले में नौ ब्लाकों के ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 827 सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों के लिए ई पास मशीनों को मंगाने का आर्डर दक्षिण भारत के चेन्नई की एक कंपनी को दिया गया था। कंपनी ने इन मशीनों को सितंबर के अंतिम सप्ताह में वाराणसी भेज दिया था। वहां से इन मशीनों को अक्तूबर के पहले हफ्ते में जिला मुुख्यालय पर भेज दिया। जिला मुुख्यालय पर सदर तहसील के सभी कोटेदारों को सांसद हरिनारायण राजभर ने ई पास मशीनों का वितरण किया। जबकि घोसी, मधुबन और मुहम्मदाबाद गोहना के कोटेदारों को इन मशीनों को वितरण कर दिया गया है।
कोटेदार संघ के जिलाध्यक्ष सुभाष पटेल का कहना है कि नीयत सही हो तो कभी भी अनियमितता नहीं हो सकती।वैसे शासन की मंशा के अनुसार ई- पास मशीनों के माध्यम से खाद्यान्न वितरण से अनियमितताओं पर अंकुश लगने में सहायता मिलेगी। जबकि राशनकार्ड धारक धरौली निवासी लीलावती, समसपुर निवासी सुशीला, भिटिया निवासी शांति तथा बड़ी कम्हरिया निवासी हसीना का कहना है कि कोटेदारों द्वारा अनाज में घटतौली और नियत मूल्य से अधिक की वसूली करते हैं। शिकायत को कोई असर नहीं पड़ता है।
जिला पूर्ति अधिकारी नरेंद्र तिवारी ने कहा कि ई-पास मशीनों से खाद्यान्न वितरण में अनियमितताओं की संभावना कम हो जाएगी।