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निकला मोहर्रम का जुलूस , अजादारों ने मातम किया

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घोसी। घोसी नगर के बड़ागांव में तीसरी मोहर्रम की रात में अलम का जुलूस निकाला गया। जिस में अजादारों ने नौहा वो मातम किया। जुलूस अजाखाने जैनबिया से बरामद होकर जाफरी मस्जिद के पास से गुजर कर सदर बाजार स्थित इमाम चौक पर दफन हुआ।
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सदर बाजार में मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना शफ़क़त तक़ी ने कहा कि कर्बला को समझने के लिए पहले इमाम हुसैन को समझना होगा। इमाम हुसैन को समझने के लिए पैग़म्बरे इस्लाम की एक हदीस समझनी होगी, एक बार की बात है पैग़म्बरे इस्लाम मस्जिद में खुतबा दे रहे थे, इतने में देखा कि छोटे नवासे सफों को चीरते हुआ अपने नाना के पास जा रहे थे कि अचानक एबा के दामन में इमाम का पैर उलझता है और जैसे ही पैगम्बरे इस्लाम ने देखा खुतबे को रोका और नवासे को गोद मे उठाते है और लाकर मिम्बर पर बैठते है और इरशाद फरमाते हैं ये हुसैन है इसे पहचानो, हुसैन मुझ से है और मैं हुसैन से हु। मौलाना ने कहा की इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में यू ही नही कहा था कि जैसे साथी मुझे मिले न मेरे नाना रसूले खुदा को मिले न मेरे बाबा अली को मिले और न मेरे भाई हसने मुझतबा को मिले। शबे आशूर इमाम ने चेराग़ गुल करके कहा जिस को जाना हो चला जाये कल हमारी जिंदगी का आखरी दिन है। थोड़ी देर बाद इमाम ने चेराग़ रौशन किया तो कोई नहीं गया। कर्बला का मोसायब सुनकर उपस्थित अजादरों की आंखे आंसुओं से भर आईं। इस अवसर पर मोहम्मद अली, उल्फत हुसैन, मारूफ, इफ्ततेखार अब्बास, काजिम हुसैन, फ़ैयाज शब्बर, सलमान अख्तर, मोहम्मद तक़ी, अली रजा गुलाब, फरहत अब्बास सहित बड़ी संख्या में अजादार उपस्थित रहे।
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