पिपरीडीह। कम बारिश होने से क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो गई है। जिन किसानों ने निजी संसाधनों से रोपाई किया भी है सिंचाई के अभाव में सूूख रही है। धान की नर्सरी में रोग लगने लगे हैं। मेहनत कमाई की फसल डूबने की चिंता किसानों को खाए जा रही है। लोग बारिश की आस में आसमान की तरफ टकटकी लगाए हुए हैं।
क्षेत्र के पिपरीडीह, भार, रैकवारेडीह, उस्मानपुर, सरेजा, नसीरपुर, खरगजेपुर, सुवराबोझ, पतिला, ताजपुर, मजखनी, हासपुर, मड़ईया, फुलवरिया, पहाड़पुर सहित विभिन्न गांवों में बारिश न होने से धान की रोपाई नाम मात्र हुई है। धान की नर्सरी में खैरा सहित विभिन्न रोग लगना शुरू हो गया है। धान की पत्तियां पूरी तरह पीली हो गई है। गांवों में सूखे खेत ही नजर आ रहे हैं। निजी संसाधनों से जिन किसानों ने रोपाई किया था। सिंचाई के अभाव में धान की फसल सूख रही है। कई खेतों में रोपी गई धान के पौधों की पत्तियां पीली पड़ गई है। कृषि विशेषज्ञों की माने तो बरसात का यही हाल रहा तो धान की पैदावार आधा से भी कम रह जाएगी। इस संबंध में कृषि बिशेषज्ञ ओपी सिंह का कहना है कि जिन किसानों की धान की नर्सरी में उपर की पत्तियां पीली पड़ कर सूख रही हो तो उसे खैरा रोग के लक्षण मान कर इसके निदान के लिए किसानों को फेरस सल्फेट का छिड़काव शुरू कर देना चाहिए।