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प्ुओं के साथ हो रही क्रूरता , इंसान की सेहत से हो रहा खिलवाड़

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बिना बच्चों वाले दुधारु जानवरों से दूध निकालने के लिए कुछ लोग इंसानों के स्वास्थ्य को खतरे में डालने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। जिले में ऑक्सीटोसिन की ब्रिकी पर प्रतिबंध का कोई असर नहीं दिख रहा है। बाजारों में प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन की ब्रिकी भी बेरोक टोक हो रही है और इसका उपयोग भी पशुओं पर खूब हो रहा है। इस दूध का उपयोग आम जन कर रहे हैं। जिम्मेदार विभागीय अधिकारी इसकी ब्रिकी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने में विफल साबित हो रहे हैं।
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जिले में दुकानदारों द्वारा ऑक्सीटोसिन की बिक्री की जा रही है। पशु पालक इस प्रतिबंधित दवा का प्रयोग कर रहे हैं। पशुओं से दूध उत्पादन के लिए प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन का खुलेआम प्रयोग किया जा रहा है। जबकि ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के प्रयोग से दुधारू पशुओं को काफी पीड़ा होती हैं, इसका प्रयोग पशु क्रूरता श्रेणी में आता है। जिले में तीन कामधेनु डेयरी, पांच मिनी डेयरी और दस माइक्रो डेयरियां पंजीकृत हैं। इसमें एक कामधेनु योजना में 100 पशु पंजीकृत हैं, इसी तरह से एक मिनी डेयरी में 50 पशुओं के हिसाब से 250 और एक माइक्रो डेयरी में 25 प्रति पशुओं के अनुसार 255 पशुओं को पंजीकृत किया गया है। इसके अलावा कस्बे और ग्रामीण क्षेत्रों में बिना पंजीकृत कई डेयरियां संचालित हो रही हैं। इनमें कई डेयरी संचालकों द्वारा दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुओं को प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन की डोज देकर दूध निकालकर ब्रिकी की जा रही है।

इनसेट
एक साल से विभाग ने नहीं की कोई कार्रवाई
मऊ। पशु पालन विभाग द्वारा पिछले एक साल से ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का प्रयोग रोकने के लिए कोई छापेमारी की कार्रवाई नहीं की गई। न्याजमुहम्मदपुरा निवासी राजेश कुमार गिहार का कहना है कि प्रतिबंध के बावजूद आक्सीटोसिन की बिक्री की शिकायत उन्होंने कई बार डीएलओ से की। उधर भदेसरा निवासी चंद्रमौलि का कहना है कि इस प्रतिबंधित इंजेक्शन का प्रयोग करके निकाला गया दूध पीकर उनका पोता बीमार पड़ गया। इसकी शिकायत के बाद भी विभाग ने कोई सार्थक पहल नहीं की। पूर्व प्रधान लेखराज का कहना है कि विभागीय अधिकारियों की उपेक्षा से आक्सीटोसिन का प्रयोग करने वाले पशुपालकों के विरुद्ध कोई सार्थक कार्रवाई नहीं की गई। जबकि आक्सीटोसिन इंजेक्शन की बिक्री कानूनन अपराध है। यदि कोई पशु पालक इसका प्रयोग करते पाया जाता है तो संबंधित को 1000 हजार रुपये जुर्माना या दो साल की कैद हो सकती है।
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चिकित्सक की राय
मऊ। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. ओपी सिंह कहते हैं कि ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगाकर निकाला गया दूध इंसान की सेहत के लिए खराब होता है। इसमें पोषक तत्वों की कमी तो होती ही है, कैल्शियम की मात्रा भी नष्ट हो जाती है। ऐसे दूध से बचना चाहिए। नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ डा. लता कुमार कहती हैं कि ऐसा दूध शिशुओं को कभी नहीं पिलाना चाहिए।
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शीघ्र ही अभियान चलाकर ऑक्सीटोसिन की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाई जाएगी और उसका प्रयोग करने वालों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। डा. भगवान सिंह , मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी मऊ।
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