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Mau News: गर्मी में सूखे 180 अमृत सरोवर, पड़ने लगीं दरारें

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मऊ। जिले में भीषण गर्मी से आम लोग ही नहीं पशु पक्षी परेशान हैं। शासन की ओर से बनाए गए अधिकांश अमृत सरोवर सूख चुके हैं। मनरेगा से खोदवाए गए तालाबों में दरारें पड़ चुकी हैं। नहर के समीपवर्ती तालाबों में भी पानी नाम मात्र के बचे हैं या सूख चुके हैं। विभागीय अभिलेखों में 303 अमृत सरोवर के तुलना में 264 बनकर तैयार हो गए हैं। कई अधूरे हैं, इसके कारण इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। विभागीय अधिकारी बजट का रोना रोकर मामले से पल्ला झाड़ ले रहे हैं।
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भू-जलस्तर को बेहतर करने के लिए जिले के सभी गांवों में अमृत सरोवर का निर्माण कराया जाना है। सरोवर के किनारे पिलर लगाकर तार की फेंसिग कराए जाने, सीढ़ी एवं रैंप निर्माण, लाइट, पाथवे, प्राकृतिक रूप से पानी के आने व निकास के लिए इनलेट एवं आउटलेट का प्रबंध होना है। तालाब को हमेशा पानी भरने के लिए सबमर्सिबल लगाया जाना है। लेकिन 50 से अधिक अमृत सरोवर आधा अधूरा बनाकर ही छोड़ दिए गए हैं। अप्रैल बीतने को है, लेकिन पारा 43 डिग्री सेल्सियस पहुंच चुका है। ऐसे में लगभग 180 अमृत सरोवर सूख गए हैं। दरारें पड़ गई हैं। मनरेगा से खुदवाए गए लगभग 700 से अधिक तालाब सूखे पड़े हैं। इसके चलते इसका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। प्यास से तड़प रहे वन्य जीव जंतु इधर-इधर भटकते देखे जा रहे हैं। नहरों के समीपवर्ती गांवों के तालाबों में भी पानी नहीं भरवाया जा सका है। इसके चलते भू-जलस्तर लगाकर खिसकता जा रहा है। जबकि प्रशासन से नहर के समीपवर्ती तालाबों में नाली के माध्यम से पानी भरवाने का निर्देश दिया गया है। लेकिन फरमान हवा हवाई साबित हो रहे हैं। तालाबों के सूखने के पीछे बरसात कम होने का अधिकारी तर्क दे रहे हैं। सरोवर और तालाबों में पानी न होने से प्यास से तड़प रहे वन्य जीव जंतु इधर-उधर भटकते हुए देखे जा रहे हैं।

कोट

कई सालों से बारिश कम हो रही है। इसके चलते तालाब सूख जा रहे हैं। नहर के समीपवर्ती तालाबों में पानी भरने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। 303 अमृत सरोवर की तुलना में 264 बनकर तैयार हो गए हैं। बजट न मिलने से समस्या आ रही है।
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उपेंद्र पाठक

डीसी मनरेगा मऊ
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