जिला कार्यक्रम अधिकारी दुर्गेश कुमार ने बताया कि जनपद में मौजूदा समय में 2587 आंगनबाड़ी और 2587 सहायिका हैं। इसमें बीते माह 62 साल पूरा कर चुकी 174 की सेवा समाप्त करने का आदेश शासन ने जारी किया। लॉकडाउन के बाद से जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के बंद चलने और जांच कार्य में उन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगाई गई, जिनकी उम्र पचास वर्ष से कम थी। ऐसे में इन कार्यकर्ताओं के हटने से फिलहाल कोई कार्य प्रभावित नहीं हुआ है। लेकिन विभागीय सूत्रों की मानें तो कार्यकर्ताओं के साथ सहायिकाओं के हटाए जाने से बाल पुष्टाहार वितरण का कार्य प्रभावित हुुआ है।
संबंधित केंद्र के कर्मचारी की जिम्मेदारी बढ़ी
सेवा समाप्ति के बाद कई आंगनबाड़ी केंद्रों में जगह खाली होने से परेशानी का सामना संबंधित केंद्र के कर्मचारी को करना पड़ रहा है। बताते चलें कि हर आंगनबाड़ी केंद्र पर एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और उसकी मदद के लिए एक सहायिका की तैनाती होती है।
ऐसे में 47 सहायिका के हटने से वहां की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर केंद्र का बोझ आ गया है। वहीं 147 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के हटने पर वहां की जिम्मेदारी संबंधित केंद्र के कर्मचारी पर आ पड़ी हैं। विभाग इस कमी को दूर करने के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज रहा है।