मऊ। जिला महिला अस्पताल को जर्जर भवन से शीघ्र निजात मिलेगी। अब यह अस्पताल जल्दी ही नये भवन में शिफ्ट किया जाएगा। बुधवार को मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में अधिकारियों की टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया। टीम ने पाया कि पुराने जर्जर भवन में अस्पताल का संचालन किया जाना खासा खतरनाक है। खतरे की स्थिति को देखते हुुए इसे जल्दी बगल में बने नए अस्पताल में शिफ्ट करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने यह निर्णय अमर उजाला में 31 जुलाई को ‘टपक रहे लेबर रूम में कराया जा रहा प्रसव’ शीर्षक से छपी खबर का संज्ञान लेते हुए लिया।
मुख्य विकास अधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी की अध्यक्षता में गठित टीम बुधवार को जिला महिला अस्पताल के जर्जर भवन का निरीक्षण करने पहुंची। टीम ने पाया कि अस्पताल के कमरों की छतों से पानी ट कर रहा है। दीवारों में भयावह नमी है। दीवारों और फर्श में करेंट दौड़ सकता है। कमरों की छतों के बारजे टूट टूटकर गिर रहे हैं। यहां तक कि वार्डों और लेबर रूम की छतों से पानी टपकता पाया गया। लेबर रूम सहित अन्य कमरों की छतों पर लगी प्लास्टर और पीओपी उखड़कर नीचे गिर रही थी। अफसरों ने पाया कि यह भवन कभी भी जमींदोज हो सकता है। इसलिए इसे खतरनाक घोषित करते हुए अस्पताल को जल्द से जल्द नए भवन में शिफ्ट करने का निर्णय लिया। सीडीओ ने नये भवन की निमार्णदायी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर को निर्देश दिया कि दो तीनों के अंदर जिला महिला अस्पताल को नये जिला महिला अस्पताल के भवन में शिफ्ट करें। साथ ही सीएमएस डा. माधुरी सिंह को वहंा व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
सीडीओ आशुतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि नया भवन भी लगभग बनकर तैयार हो गया है केवल बिजली की फिटिंग का कुछ काम बाकी है और लिफ्ट लगाया जाना बाकी है।
चार साल पहले किया था खतरनाक घोषित
मऊ। जिला महिला अस्पताल के जर्जर भवन को चार साल पहले ही लोकनिर्माण विभाग के इंजीनियरों ने खतरनाक घोषित करते हुए इस गिराने की सलाह दे दी थी। लेकिन उनकी सलाह को दरकिनार करके बसपा शासन काल में तत्कालीन सांसद द्वय दारासिंह चौहान (वर्तमान वन एवं पर्यावरणण मंत्री उत्तर प्रदेश) और सालिम अंसारी ने पुराने परित्यक्त भवन में 29 नवंबर 2011 को लोकार्पण कर दिया।