मऊ। स्वच्छता कार्य के लिए 14 हवे वित्त के तहत शासन से भेजी गई 18 करोड़ की धनराशि को वितरित करने की बजाय उसे दबाए रखने और वित्तीय वर्ष के अंतिम समय में वितरित करने के लिए बिल प्रस्तुत करने के मामले को जिलाधिकारी ने वित्तीय अनियमितता बताते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी शेषदेव पांडेय और मंडलीय उप निदेशक पंचायती राज आजमगढ़ जयदीप त्रिपाठी के विरूद्घ कार्रवाई करने की संस्तुति करते हुए शासन को पत्र भेजा। दोनों पर सात माह तक धनराशि को दबाए रखने का आरोप लगाया गया है।
शासन को भेजे पत्र में डीएम प्रकाश बिंदु ने बताया कि जिले की ग्राम पंचायतों एवं क्षेत्र पंचायतों के लिए 14हवे वित्त आयोग की धनराशि 14.37 करोड़ ग्राम पंचायतों को 2करोड़ 80 लाख रुपये शासन से 28 अगस्त 2017 को आवंटित की गई थी। रकम की उपलब्धता के बावजूद डीपीआरओ ने सात महीने तक इस दबाए रखा और फरवरी के अंतिम सप्ताह में दो किश्तों में कोषागार से आहरित करने के लिए पत्रावली उपनिदेशक पंचायत के माध्यम से सीडीओ को प्रस्तुत की गई। शासनादेश के अनुसार सभी धन चार किश्तों में सितंबर, नवंबर, जनवरी एवं मार्च में पंचायतों को दिए जाते हैं। लेकिन उपनिदेशक द्वारा ग्राम पंचायतों में ग्रामवार धनराशि का आवंटन नहीं किया गया है और न ही कोई कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। डीएम ने लिखा है कि इन तथ्यों से स्पष्ट होता है, कि जिला पंचायतराज अधिकारी ने जनपद को चतुर्थ वित्त आयोग की धनराशि ग्राम पचायतों को हस्तांतरित करने में जान बुझकर सात महीनों की देरी की। इसके कारण विकास कार्य बाधित हुए हैं। इस आवंटन में लगभग 18 करोड़ रूपये की धनराशि निहित है। इतनी बड़ी धनराशि को रोककर विकास, कार्य बाधित करना शासन की स्वच्छ एवं पारदर्शी नीति के विरूद्ध है। जिला पंचायतराज अधिकारी द्वारा जान बूझकर वित्तीय वर्ष के अंतिम माह में धनराशि आवंटन की फाईल प्रस्तुत की गयी है। ग्राम पचायतों को आवंटित धन का ग्रामवार विवरण भी नहीं दिया गया है। इससे ग्राम पचायतों को मनमाने ढंग से धनराशि आवंटन किए जाने की संभावना बढ़ गई है। चार किश्तों में शासनादेश की अनदेखी करते हुए पूरा बजट एक किश्त में जारी करना नियमों के विपरीत है। इसके साथ ही व्यय की दो-दो पत्रावलियां व्यवहारिक करके उच्चाधिकारियों को भ्रमित करने का प्रयास किया गया है। डीएम ने जिला पंचायत राज अधिकारी शेषदेव पांडेय एवं मंडल उपनिदेशक जयदीप त्रिपाठी के खिलाफ अनुशासनिक कार्यंवाही करने की संस्तुति कर दी है।
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डीपीआरओ के विरुद्ध पूर्व में भी भेजे जा चुके हैं दो पत्र
डीपीआर को की कार्यप्रणाली से खिन्न जिलाधिकारी इससे पूर्व भी दो पत्र शासन को लिख चुके हैं। डीएम ने जिला पंचायतराज अधिकारी को 23 अगस्त एवं 14 अक्टूबर 2017 को यहां से हटाने के लिए शासन को पत्र लिखा था।