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जिले के परिषदीय विद्यालयों में घट गए 16562 बच्चे:

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जिले के परिषदीय विद्यालयों में गत वर्ष के मुकाबले नामांकन में 16562 बच्चों की कमी दर्ज की गई है। शासन की तरफ से विद्यालयों में अत्याधुनिक सुविधाएं बहाल करने के लिए आपरेशन कायाकल्प तथा बच्चों की शत प्रतिशत उपस्थिति के लिए चलाई जा रही मिड-डे मील, नि:शुल्क यूनिफॉर्म, नि:शुल्क पाठ्यपुस्तक सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित होने के बावजूद नामांकन में कमी विभागीय व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न खड़ा कर रही है।
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जिले में 1208 परिषदीय विद्यालय हैं। शासन स्तर से विद्यालयों में आपरेशन कायाकल्प योजना के माध्यम से आधुनिक बुनियादी सुविधाएं बहाल की जा रही है। विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए यहां योग्य शिक्षकों की नियुक्ति भी की गई है। उनकी उपस्थिति की जांच के लिए प्रतिदिन आनलाइन मानीटरिंग की जा रही है। बावजूद शिक्षा व्यवस्था बेपटरी होने से अभिभावक अपने बच्चों को परिषदीय विद्यालयों में न भेज कर निजी स्कूलों में भेज रहे हैं।
देखा जाए तो जिले के परिषदीय विद्यालयों में छात्रों का ज्यादा से ज्यादा नामांकन कराने के लिए कई अभियान तथा प्रोत्साहन योजनाएं चलाई जा रही है, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो वर्ष 2023-24 में 144949 बच्चों का नामांकन किया गया है। जबकि वर्ष 2022-23 में 161511 बच्चों का नामांकन किया गया था।
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कोरोना की वजह से बढ़ी थी संख्या:
मऊ। खंड शिक्षा अधिकारी फतहपुर मंडाव सुनील कुमार सिंह का कहना था कि नामांकन घटने में कई कारण हैं। पहला कारण इस वर्ष विद्यालयों में एडमिशन लेने वाले बच्चों की यूनिक आईडी जारी की गई है। बच्चा सरकारी तथा निजी विद्यालयों में से किसी एक में ही दाखिला ले सकता है। दूसरा कारण इस वर्ष पहली कक्षा में छह वर्ष के बच्चों का नामांकन किया जाना है। जबकि पहले पांच वर्ष का नियम था। तीसरा कारण कोरोना काल में आर्थिक तंगी के कारण तमाम अभिभावकों ने निजी विद्यालयों में फीस जमा नहीं करा पाए थे। ऐसे में उन्होंने कोरोना के बाद विद्यालय खुलने पर निजी विद्यालय छोड़कर अपने बच्चों का पंजीकरण परिषदीय विद्यालयों में करा लिया था। जो बच्चे निजी विद्यालय छोड़कर आए थे वह धीरे-धीरे निजी विद्यालयों में लौट गए हैं, जिसकी वजह से भी संख्या गिरी है।

कोट-
पहले बच्चे लाभ लेने के लिए दो-दो जगह पंजीकरण करा लेते थे, लेकिन इस वर्ष यूडायस भरा गया है, जिसमें प्रत्येक पंजीकृत छात्र का आधार नंबर लिया गया है। इससे फर्जी पंजीकरण खत्म हुए हैं। कोरोना के समय आए बच्चों में से कुछ वापस भी गए है। नामांकन में नाम मात्र ही कमी आई है। संतोष कुमार उपाध्याय, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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