जिले के निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्डधारकों को इलाज कराने के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। अस्पताल जल्दी इन्हें इलाज के लिए नहीं ले रहे। ऐसे में विभिन्न शिकायती पोर्टलों पर रोजाना कम से कम 10 ऐसी शिकायतें आ रही हैं। उधर, सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की कमी आयुष्मान कार्डधारको के लिए मुसीबत खड़ी कर रहे हैं। नतीजतन उन्हें भारीभरकम राशि इलाज के लिए खर्च करनी पड़ रही है। ऐेसे में आयुष्मान कार्ड से निजी अस्पतालों में इलाज के दावे हवाई साबित हो रहे हैं।
केंद्र सरकार ने गरीबों को नि:शुल्क उपचार देने के लिए 23 सितंबर 2018 को आयुष्मान योजना का शुभारंभ किया था। उस समय आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए वर्ष 2011 की बीपीएल सूची में शामिल गरीबों को पात्र बनाया गया था। बाद में अंत्योदय योजना, श्रम कार्ड, उज्जवला योजना, पीएम और सीएम का पत्र पाने वालों लाभार्थियों कोे भी शामिल किया गया। अभी पात्र गृहस्थी कार्ड धारकों को भी योजना में शामिल किया गया है। लेकिन सही मायने में योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। खात तौैर पर निजी अस्पताल से मरीजों को उपचार की बजाय निराशा ही मिल रही है। जनपद में जनपद में 28 निजी और 11 सरकारी अस्पताल योजना से जुड़े हैं। मरीज के उपचार के बाद अस्पताल को 21 दिनों बाद भुगतान किया जाता है।
विभागीय आकड़ों के अनुसार, आयुष्मान योजना के लाभार्थियों द्वारा निजी अस्पतालों में समय से उपचार नहीं मिलने पर प्रतिदिन दस लिखित शिकायत मिल रही हैं। वही अन्य पोर्टल को देखा जाए तो यह आकड़ा और भी अधिक हो जाएगा। लिखित शिकायत के बाद जनवरी से लेकर सितंबर माह तक सीजीआरएम पोर्टल पर 760, पीएम पोर्टल पर 76, सीएम पोर्टल पर 110 शिकायतें मिल चुकी हैं। जारी किए गए टोल फ्री नंबर 18004444 और डिस्ट्रीक ग्रेवांस मैनेजर के मोबाइल तथा अन्य पोर्टल के माध्यम से शिकायतें की जाती हैं। आनलाइन होने वाले सभी शिकायतों को जिले को स्थानांतरित किया जाता है, जिला की स्क्रीनिंग कमेटी जिसमें नोडल अधिकारी के साथ डिस्ट्रीक ग्रेवांस मैनेजर शामिल होते हैं, वह इन शिकायतों को देखते हैं। सीएमओ डॉ. नंदकुमार ने बताया कि आयुष्मान योजना के लाभार्थियों के शिकायतों के निस्तारण के लिए जिला प्रशासन के निर्देश पर दो सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। इसके अलावा मिलने वाली शिकायतों को भी सुना जाएगा।
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अस्पतालों को भुगतान का क्या है प्रावधान
मऊ। आयुष्मान कार्ड धारक द्वारा किसी भी बीमारी का उपचार कराने के लिए योजना से जुड़े अस्पताल में भर्ती होने पर अस्पताल उसकी रिपोर्ट टीवीए यानि थर्ड पार्टी एसोरेंस को दिया जाता है। जहां पर हर बीमारी के उपचार का खर्च पहले से तय होता है, वह उसकी रिपोर्ट तैयार कर साचीज नामक कंपनी को देती है, जो आयुष्मान योजना का संचालन करती है। मरीज के उपचार से संबंधित सभी भुगतान को 21 दिनों के भीतर करने का निर्देश है।
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क्या है आकड़े
जनपद में कुल 7 लाख 56 हजार 981 पात्रों का आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 5 लाख 236 लाभार्थियों का कार्ड बन चुका है। 2 लाख 56 हजार 745 पात्रों का अभी कार्ड बनना शेष है। अभी तक जनपद में इस योजना का लाभ 33 हजार 947 लोगों का मिल चुका है। मरीजों के उपचार के लिए अभी तक अस्पतालों काे 11 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। जबकि 18 लाख भुगतान होना बाकी है।
मई माह में किया गया था सम्मानित
मऊ। जनपद में गोल्डेन कार्ड बनाने के लिए जनपद काे पूरे प्रदेश में 5 वां स्थान मिला था। कार्ड बनाने में बेहतर कार्य करने के लिए प्रमुख सचिव द्वारा सम्मानित किया गया था।
केस स्टडी
नंबर एक
कोपागंज ब्लाक क्षेत्र के मसीना निवासी सविता की नगर के एक निजी अस्पताल में 29 जुलाई को पैर की सर्जरी हुई। आरोप है कि अच्छी क्वालिटी का उपकरण लगाने के नाम पर उनसे 15 से 20 हजार रुपए लिए गए। महंगे दवाओं के नाम पर अलग से रुपए लिए गए। लेकिन बिल नहीं दिया गया। हर 15 दिन पर ड्रेसिंग के लिए जाने पर तीन हजार रुपए लिए जाते हैं। जबकि वह अंत्योदय कार्ड धारक भी हैं।
केस नंबर दो-
नगर के राघव पट्टी निवासी जगरनाथ का कूल्हे का सफल प्रत्यारोपण एक निजी अस्पताल में हुआ है। बोले कि निजी अस्पतालों की भांति सरकारी अस्पतालों में यहीं सुविधा हो जाए तो यह योजना हर लोगों की पहुंच में होगी।
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केस नंबर तीन- कहिनौर निवासी प्रमोद कुमार कहते हैं कि उनके आंखों में परेशानी हैं, लेकिन जिला अस्पताल में यह सुविधा उन्हें नहीं मिल सकी मांग की सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त संसाधन मुहैया कराए जाए।
केस नंबर चार-
कोपागंज निवासी राममिलन का कहना है कि यो योजना में शामिल होने के बाद निजी अस्पतालों द्वारा उनका इलाज करने में हीलाहवाली करने पर उन्होंने बाहर जाकर इलाज कराया।