बारिश नहीं होने से फसलों पर वितरीत असर पड़ने लगा है। ऊपर से लो बोल्टेज के चलते निजी नलकूपों के संचालन में भी दिक्कतें हो रही है। ऐसे में सिंचाई के अभाव में धान की फसल मुरझाने लगी है। किसानों ने बारिश के लिए भगवान इंद्र की पूजा- अर्चना शुरू कर दी है।
क्षेत्र के पिपरीडीह, भार, ओन्हाईच, अहीलाद, खरगजेपुर, सिहांव, रैकवारेडीह, सरेजा, बबुआपुर, मंसड़ी, उस्मानपुर, पतिला, हासपुर, मड़ईया,फुलवरिया सहित विभिन्न गांवों में व्यापक पैमाने पर धान की खेती होती है। इस समय धान की फसल के लिए पानी की सख्त जरूरत है, लेकिन बारिश नहीं होने से सूखे की स्थिति पैदा हो गई है। लो-वोल्टेज के कारण निजी नलकूपों का भी संचालन नहीं हो पा रहा है। इससे किसानों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। सावन में अच्छी बारिश होने से किसान भरपूर पैदावार के सपने संजोने लगे थे, लेकिन अब वह नाउम्मीद होने लगे हैं। सिंचाई के ऐन वक्त पर मौसम के साथ ही बिजली भी किसानों का साथ छोड़ चली है। कहने को तो परदहां ब्लाक के कोटवां स्थित विद्युत उपकेंद्र से 12 से 14 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है, लेकिन धरातलीय स्थिति यह है कि छह घंटे भी बिजली नहीं मिल पा रही है। लो वोल्टेज के चलते निजी नलकूप की मोटर फुंक रही हैं। पंप से पूरा पानी नहीं मिलने से एक बीघा खेत की सिंचाई में दस से 12 घंटे से अधिक का समय लग रहा है। खरगजेपुर के किसान चंद्रिका सिंह, नरेंद्र सिंह, ओपी सिंह, समसुद्दीन अहमद, जगरनाथ यादव का कहना है कि सिंचाई के अभाव में फसल पीली पड़ने लगी है। लो वोल्टेज के कारण सिंचाई की इतनी बदतर स्थिति हो चुकी है कि किसानों को किराए पर डीजल पंपसेट लगाकर सिंचाई करनी पड़ रही है।