मऊ। बरसात में ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा को लेकर विद्युत विभाग लापरवाह बना हुआ है। खुले में लगे इन ट्रांसफार्मरों को अभी तक सुरक्षति रखने का इंतजाम नहीं किया जा सका है। ऐसे में स्पार्किंग होने से आसपास के लोग दहशत में हैं। जबकि शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं की जा रही।
जिले में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करने के लिए शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 9653 ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। अब बारिश की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में खुले में लगे यह ट्रांसफार्मर हादसे को आमंत्रण दे रहे हैं। नियम के मुताबिक ट्रांसफार्मरों को ऊंचाई पर लगाकर इसके चारों तरफ जाली लगाया जाना चाहिए। हालत यह है कि कम ऊंचाई पर ही खुले में ट्रांसफार्मरों को लगा दिया गया है। घनी आबादी के बीच लगे इन ट्रांसफार्मरों से बरसात में स्पार्किंग हो रही। किसी अप्रिय घटना से यहां के लोग सहमे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो विद्युत वितरण खंड प्रथम में 3003 ट्रांसफार्मर, विद्युत वितरण खंड द्वितीय में 3563 ट्रांसफार्मर तथा विद्युत वितरण खंड तृतीय में 3087 सहित 9653 ट्रांसफार्मरों को लगाया गया है। नगर के गाजीपुर तिराहा, निजामुद्दीनपुरा, बकवल मोड़, सूखापट्टी सहित कई मुहल्लों में यह खुले में लगाए गए हैं। जबकि ग्रामीण इलाकों के मझवारा बाजार, कहिनौर, बढुआगोदाम, पूराघाट कुर्थीजाफरपुर, पवनी, रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र सहित तमाम इलाकों में खुले में लगे ट्रांसफार्मर से लोग दहशतजदा हैं। मझवारा क्षेत्र के शिवकुमार यादव, राजेश कुमार सिंह, वीरबहादुर राय, संदीप मौर्य, अरविंद मूर्ति का कहना है कि खुले में लगे ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित करने के लिए आला अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं हो सका है। ऐसे में लगातार किसी हादसे की आशंका बनी रहती है। अधिकारी हैं कि उनका इस ओर ध्यान ही नहीं है। अधीक्षण अभियंता एसएस प्रसाद ने कहा खुले में लगे ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। जून माह तक समय लग सकता है।