त्याग, तपस्या और समर्पन तथा ध्यान लगाने के साथ सतगुरु के ज्ञान के माध्यम से ही प्रभु की प्राप्ति होती है। सतगुरु के मिलते ही मोह माया आदि के बंधन छूट जाते है। यह विचार सलहाबाद के मिश्रौली गांव में आयोजित सनातन भजन और सतसंग कार्यक्रम में में संत स्वामी जयगुरु बंदे महाराज ने कही।
संत स्वामी जयगुरुदेव महराज ने कहा कि गुरु भवसागर रूपी पिंजडे से मुक्त होने का सरल युक्ति बताते है। बोले गुरु के ज्ञान का चछु सदैव खुला होना चाहिए और शिष्य को बहरा नहीं होना चाहिए। अर्थात गुरु को अंधा तथा शिष्य को बहरा नही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरु के चरणो व उनके नाम से मनुष्य को मुक्ति नही मिलती, बल्कि गुरु के बताए मार्ग का अनुसरण करने से ही मुक्ति मिल सकती। गुरूबंदे जी महाराज ने लोकभाषा मे हृदय स्पर्शी भजनों को सुना कर श्रोताओं को भक्ति की अविरल धारा में तरबतर कर दिया। उन्होंने ने कहा की गुरु तत्वदर्शी व शब्द भेदी होना चाहिए। गुरु जब मनुष्य के जीवन मे आता है तो मनुष्य के जीवन का अंधकार मिट जाता है और वह सद्गुणी हो जाता है। इस अवसर पर मुख्य यजमान राम बचन यादव शिव बचन यादव आदि ने सद्गुरु की आरती उतारा तथा विशाल भंडारा गुरु जी के कमलवत हाथो से खोला गया तथा प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से महेंद्र प्रसाद, कमल कुमार यादव, जय प्रकाश, छवि राम यादव, अभिराम यादव , भरत प्रजापति, सुनील, लाला, राहुल शर्मा, हंसराज, नीरज ,सतीश जायसवाल, गोलू, डॉ राम गोपाल गुप्त, सुभाष चंद कनौजिया, बाबू राम सहित हजारो लोग उपस्थित रहें।