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सूचना के बाद भी विलंब से पहुंच रहीं एंबुलेंस

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किसी जमाने में 108 और 102 नंबर की एंबुलेंस 30 मिनट में पहुंच जाती थी। लेकिन, अब इसके समय पर न पहुंचने की शिकायतें बढ़ गई हैं। जिले में 108 और 102 नंबर की एंबुलेंस की 47 एंबुलेंस हैं। लेकिन इनमे अधिकांश गाड़ियों की स्थिति खस्ताहाल है। यहीं नहीं अधिकांश एंबुलेंस में मानक के अनुसार न तो दवाइंया उपलब्ध है न ही आक्सीजन व स्ट्रेचर। इस अव्यवस्था के चलते एंबुलेंस के पहुंचने पर मरीजों व तीमरदारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा दिक्कत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को उठानी पड़ रही है।
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जिले की 23 लाख की आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए एक जिला अस्पताल, एक महिला जिला अस्पताल, 9 सामुदायिक और 38 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित होते है। जिले में किसी हादसा, सड़क दुर्घटना, बीमारी या अन्य परिस्थितियों में घायलों को पहुंचाने के लिए 27 की संख्या में 102 एंबुलेंस और 17 की संख्या में 108 एंबुलेंस और तीन एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस है। जहां एंबुलेंस चालक तथा सहायकों की संख्या 174 है। इसकी मानीटरिंग के लिए प्रोग्राम मैनेजर, दो इमरजेंसी मैनेजमेंट एक्जीक्यूटिव अधिकारी की नियुक्ति है। इतने संसाधन के बावजूद कई बार घायलों को एक घंटे की बाद एंबुलेंस द्वारा पहुंचाया जा रहा है। जबकि विभागीय आंकड़ों के अनुसार एंबुलेंस को नगर क्षेत्र में 20 तथा ग्रामीण क्षेत्र में 30 मिनट के अंदर पहुंचना है। लेकिन नगर क्षेत्र में ही यह 40 और ग्रामीण क्षेत्रों में 50 मिनट बाद पहुंच रही है। सूत्रों की माने तो कई बार विलंब के चलते 100 डायल ही घायलों को अस्पताल में लाकर भर्ती कराते है। इसके अलावा मौजूदा 47 एंबुलेंसों में अधिकांश खस्ताहाल हैं।
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