स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में टीबी रोग के प्रति जागरूक करने तथा टीबी रोग से पीड़ित मरीजों को खोजने के लिए टीबी खोजो अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत दो दिनों में ही 10 नए मरीज चिह्नित हो चुके है। मई तक 896 नए मरीज मिल चुके है। 2016 में जहां ऐसे रोगियों की संख्या 1993 थी। वहीं मई 2019 में अब तक यह संख्या 1461 पहुंच चुकी है। जिसमें 896 टीबी क्लीनिक में अपना इलाज करा रहे है जबकि 565 मरीज प्राइवेट चिकित्सकों के यहां इलाज करा रहे हैं।
टीबी डॉट्स केंद्रों के आंकड़ों की माने तो मऊ में हर माह 50 से ज्यादा टीबी के मरीज मिल रहे है, जबकि ग्रामीणांचल से यह ग्राफ औसतन 30 मरीजों का है। विशेषज्ञ इसकी वजह जागरूकता की कमी होने के साथ शहरी परिवेश में कम जगहों ज्यादा लोगों के रहनेे के साथ दूषित माहौल और खानपान को रोग का कारण मान रहें हैं। जिले के डॉट्स सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक 2016 में जिले में टीबी के कुल मरीजों की संख्या 1993 पंजीकृत की गई थी। जिसमें मऊ शहर में टीबी मरीजों की संख्या 416 थी, जबकि इसके अलावा घोसी में 330, रतनपुरा में 241 मरीज चिन्हित किए गए थे। वहीं 2017 में जिले में मरीजों की संख्या 2593 थी। इसमें मऊ शहर में मरीजों की संख्या 296 थी, जबकि घोसी में 196 और रतनपुरा में 106 मरीज चिन्ह्ति किए गए थे। इसीक्रम में इस वर्ष 2018 में जिले में कुल मरीजों की संख्या 3335 चिह्नित की जा चुकी है। वहीं 25 मई 2019 तक यह संख्या 1461 पहुंच चुकी है।
बताते चले कि वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीबी रोगी खोजी अभियान 10 जून से 22 जून तक चलाया जा रहा है। इसके तहत अब तक 39 हजार 369 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। जिसमें 10 मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई है।
इस बाबत जिला क्षय अधिकारी डॉ. एसपी अग्रवाल का कहना है कि मरीजों की संख्या बढ़ने के पीछे जागरूकता बढ़ना है। पहले की अपेक्षा लोग अब टीबी के लक्षण होने पर जांच कराने के लिए अस्पताल पहुंच रहे है। वहीं शासन द्वारा भी टीबी जड़ से खत्म करने तथा मरीजों को प्रोत्साहित करने के लिए हर माह 500 रुपये का प्रोत्साहन राशि दे रही है।