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काशीदास पूजा में जयकारों से गूंजा पंडाल

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कोपागंज थाना क्षेत्र के ग्राम देवकली विशुनपुर में रविवार को काशीदास बाबा की पूजा विधि विधान से संपन्न हुई। पुजारी पारस नाथ ने अपने सहयोगी अखिलेश के साथ बाबा काशीदास की पूजा कराई। पूजा में लोक कल्याण और जनमानस के साथ ही सभी प्राणियों के स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की गई। पंथी पारस नाथ ने वन सप्ती और बाबा काशीदास के आह्वान कर लोक कल्याण और विश्व के मंगल की कामना किया।
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पंथी ने बताया कि कृष्णावतार में गोकुल में देवताओं के राजा इंद्र को प्रसन्न करने के लिए एक विशेष पूजा की जाती थी। श्रीकृष्ण ने उसका विरोध करते हुए उसे बंद करा दिया। इससे नाराज होकर इंद्र ने खूब वर्षा की, जिससे गोकुलवासी ब्याकुल होने लगे तब कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठा कर गोकुलवासियों की रक्षा की। बाबा काशी दास उन्हीं भगवान श्री कृ ष्ण के अनन्य भक्त थे। काशीदास अपने तपोबल से भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न किया। उसी समय से बनसत्ती और काशीदास की पूजा होती चली आ रही है। उन्होंने बताया कि काशीदास को एक वर्ग अथवा जाति विशेष का देवता मानना भूल है। कहा कि काशीदास ने अपने तपोबल से भगवान को प्रसन्न करके विश्व कल्याण के लिए विवश किया। पंथी ने मंत्रोच्चार से स्वत:स्फूर्त अग्नि प्रज्वलित किया और उसी अग्नि से हवन कुंडों में आहुतियां दी गईं। पंथी ने लोक कल्याण के लिए प्रार्थना किया और मौसम संबंधी भविष्यवाणियां भी कीं। पूजा के दौरान भगवान श्री कृष्ण, बाबा काशीदास और मां वनसप्ती के जयकारों से पंडाल गूंजता रहा। पूजा के अंत में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
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