मऊ। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सतीशचंद्र सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 6-23 माह के 5.3 प्रतिशत बच्चों को ही पर्याप्त आहार मिल पाता है। पांच वर्ष तक के 46.3 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जिनकी लंबाई, उनकी आयु के अनुपात में कम है। 17.9 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जिनका वजन उनकी लंबाई के अनुपात में कम है तथा 39.5 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जिनका वजन उनकी आयु के अनुपात में कम है। वहीं पांच वर्ष तक के 63.2 प्रतिशत बच्चों में खून की कमी पाई गई।
रैपिड सर्वे ऑफ चिल्ड्रेन (2013-14) के आंकड़े दर्शाते हैं कि सही खान-पान के अभाव में प्रदेश के 50.4 प्रतिशत बच्चे अविकिसित, 10 प्रतिशत कमजोर व 34.3 प्रतिशत बच्चे कम वजन के रह जाते हैं। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए शुरू के 1000 दिन का समय बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान पोषण का खास ख्याल रखना बहुत ही जरूरी होता है क्योंकि इस दौरान हुआ स्वास्थ्यगत नुकसान पूरे जीवन चक्र को प्रभावित कर सकता है। मां यदि बच्चे को सही पोषण उपलब्ध कराएं तो बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और बच्चा स्वस्थ जीवन जी सकेगा। बच्चे के सही पोषण के बारे में जागरूकता के लिए ही आंगनबाड़ी केंद्रों पर बचपन तथा अन्नप्राशन दिवस का आयोजन किया जाता है, जिसमें बच्चा छह माह की आयु पूरी होने पर पहली बार अन्न चखता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार नवजात शिशु को स्तनपान के साथ-साथ छह माह की आयु पूरी होने के बाद पूरक आहार शुरू कर देना चाहिए। पूरक आहार को छह माह के बाद ही शुरू करना चाहिए।