रेलवे कॉलोनी में तीन माह से कराया जा रहा विकास कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में कालोनीवासी परेशान हैं। निर्माण कार्य को फरवरी माह में ही पूरा होना था, लेकिन स्थानीय रेलवे अधिकारियों की लापरवाही से यह अभी तक अधूरा पड़ा है। ।
बताते चले महाप्रबंधक राजीव अग्रवाल के बीते 9 फरवरी को वार्षिक निरीक्षण को देखते हुए रेलवे द्वारा चार सेक्टर में बंटी रेलवे कॉलोनी का सुंदरीकरण, पानी की निकासी के लिए नाली निर्माण, मनोरंजन के लिए दो पार्को का निर्माण करना था। ऐसे तो यह कार्य फरवरी माह से पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन जीएम के निरीक्षण के कुछ दिन पहले यह काम शुरू किया गया। जहां रेलवे अधिकारियों द्वारा आनन फानन में रेलवे स्टेशन का तो कायाकल्प कर दिया गया। वहीं जीएम के निरीक्षण को देखते हुए कॉलोनी के आवासों का रंगरोगन किया गया। जबकि 30 लाख से ज्यादा की लागत से बन रहे दो पार्को का निर्माण अधूरा ही रहा। निरीक्षण के दौरान जीएम ने 30 मिनट से ज्यादा कॉलोनी के आवासों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पार्को की निर्माण की जानकारी ली।
सूत्रों की माने तो अधिकारियों द्वारा नाली निर्माण, पार्को का निर्माण फरवरी माह में ही पूरा होने की बात कही गई। लेकिन जीएम के निरीक्षण के अगले दिन के बाद से निर्माण कार्य बंद हो गया। हालात यह है कि तीन माह से ज्यादा समय बीतने के बाद ना तो पार्क का कार्य शुरू हो सका ना ही कॉलोनी में गंदे पानी की निकासी के लिए नाली निर्माण शुरू हो सका। यहीं नहीं रेलवे कॉलोनी में बने कई आवास अंदर से इतने जर्जर हो चुके है कि कभी भी बड़ा कोई हादसा हो सकता है। सूत्रों की माने तो स्थानीय रेलवे स्टेशन के एक बड़े अधिकारी को बंगला आवंटित तो हुआ है, लेकिन बंगला जर्जर होने के चलते वो बंगले के बजाए हिंदी भवन के पास बने रेलवे कॉलोनी स्थित क्वाटर में रहने को मजबूर है। जबकि अधिकारी द्वारा बंगले के मेटेनेंस के लिए कई बार इंजीनियर विभाग के अधिकारियों को शिकायत कर चुके है, बावजूद मेटेनेंस नहीं कराया जा रहा है।
कार्यालय मंडल रेल प्रबंधक वाराणसी के जनसंपर्क अधिकारी महेश गुप्ता ने बताया कि स्थानीय अधिकारियों से जानकारी ली जाएगी। साथ ही अधूरे पड़े विकास कार्यों को प्राथमिकता में कराया जाएगा।