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खुले में डंप हो रहा बायो मेडिकल वेस्ट

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शहर के सरकारी और निजी अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट को शहर में ही इधर-उधर फेंका जा रहा है। चंद रुपये बचाने के लिए यह खेल खुलेआम चल रहा है। सूत्रों के माने तो शहर में रोज डेढ़ से दो क्विंटल मेडिकल वेस्ट निकलता है। इसे शहर में ही इधर-उधर फेंक दिए जाने से संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है।
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मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में नगर में 38 निजी अस्पताल पंजीकृत हैं, लेकिन यह संख्या सैकड़ों में है। जहां इन निजी अस्पतालों द्वारा अपने अपने अस्पताल से बायोमेडिकल वेस्ट से निस्तारण किए जाने के लिए एनजीओ से करार होने का दावा तो किया जाता है। जहां बकायदा इनके द्वारा विभाग को कंपनी को मासिक या सालाना भुगतान करने की बात भी कही जाती है। बावजूद जिले के ढेकुलिया घाट, गाजीपुर तिराहा, नरही बांध, राष्ट्रीय राज्यमार्ग 29 पर कई जगहों पर मेडिकल वेस्ट पर रोजाना डंप होता है। खास बात यह है कि यह मेडिकल कचरा नगर पालिका द्वारा सफाई के दौरान संग्रहित कर डंप किया जाता है। इसके अलावा पुरानी तहसील के पास खाली पड़े एक प्लांट में कुछ निजी अस्पतालों द्वारा मेडिकल वेस्ट डंप किया जाता है। जबकि नियमानुसार कचरा डंप करने के लिए एनजीटी नियमों के मानक के अनुसार किसी पंजीकृत एनजीओ से मेडिकल वेस्ट का निस्तारण कराना है। बावजूद मेडिकल वेस्ट को निस्तारित करने के बजाय पालिका के डंप किए जाने वाले कूड़े के पास इसे फिंकवा देती हैं। इस तरह से पड़ा रोगाणु युक्त कचरा बीमारियों को खुली दावत देता है और कभी भी महामारी का कारण बन सकता है। मेडिकल वेस्ट का सही निस्तारण न होने से संक्रामक बीमारियों का खतरा रहता है। यहीं नहीं ब्लड बोन डिसीज के चांस अधिक रहते हैं। इस कचरे में किसी एक नहीं बल्कि सभी बीमारियों के वायरस रहते हैं। कीट, पतंगे और मच्छरों के जरिये मलेरिया जैसी या उससे भी घातक तमाम बीमारियां फैलती हैं।
कोट
जो अस्पताल मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में लापरवाही बरत रहे हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मेडिकल वेस्ट का उठान 48 घंटे में होना चाहिए। इसे हर हाल में लागू कराया जाएगा।
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डॉ. सतीशचंद्र सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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