कोपागंज। स्वच्छता अभियान के तहत स्थानीय ब्लॉक के 78 ग्राम पंचायतों में से 27 गांवों को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। पंचायती राज विभाग की तरफ से 21.60 करोड़ रुपये खर्च कर 18 000 शौचालयों का निर्माण कराने का दावा किया गया है। लेकिन ब्लाक के गांवों की तस्वीरें आज भी पुरानी ही हैं। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद ग्रामीण इलाकों में अभी भी शौचालयों का उपयोग नहीं हो रहा है। सबसे बुरा हाल समग्र लोहिया गांवों का है। गांवों की स्थिति बदतर बनी हुई है। इन गांवों में न तो ओडीएफ का असर दिख रहा है औ न ही स्वेच्छाग्रहियों की क्रिया कलापों का ही है।
कोपागंज ब्लाक में कुल 81 ग्राम पंचायतों में 2014 से अब तक 18135 शौचालयों का चयन किया गया था। इनमें अब तक 18000 शौचालय का निर्माण पूर्ण हो चुका है। ब्लॉक के 27 ग्रामसभाओं को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। इतने बड़े पैमाने पर शौचालयों के निर्माण के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुयी है। ओडीएफ घोषित गांवों की स्थिति यह है की शौचालय होने के बावजूद भी सड़कों के किनारे गंदगी करना आम बात हो गई है। चिश्तीपुर गांव में कई लोग शौचालयों में कुत्तों और बकरियों को बांधते हैं। ग्रामीणों को जागरूक करने का विभागीय दावा महज दिखावा साबित हो रहा है। गांव के लोग समुचित जानकारी न होने के कारण अभी तक अपने घरों पर शौचालय नहीं बना पाए। जबकि विभागीय अधिकारियों का दावा है कि समय समय पर जागरूकता कार्यक्रम चलाकर ग्रामीणों को जागरूक किया जाता है। जनपद स्तरीय नोडल अधिकारी की देख रेख में मार्निंग फालोअप कार्यक्रम होते रहे। गांवों में तैनात सचिव, ग्राम प्रधान तथा अन्य ब्लाक अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ सुबह 5 बजे पहुंच ग्रामीणों को पगडंडियों पर शौच न करने का आग्रह करते रहे। इसके बावजूद ग्रामीणों पर इसका असर नहीं पड़ रहा। इस बाबत एडीओ पंचायत शीत कुुमार सिंह का कहना है कि टीमों को लगाकर ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा। चिस्तीपुर गांव के कुछ दबंगों ने शौचालयों के निर्माण में मनमानी की है। उनके खिलाफ नोटिस जारी किया जाएगा।