परदहां ब्लाक क्षेत्र के कहिनौर गांव स्थित पौराणिक स्थल वनदेवी धाम उपेक्षित हाल में है। यहां पर पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से लोग मत्था टेकने के लिए आते हैं, लेकिन यहां सुविधाओं का अभाव है। वनदेवी धाम मार्ग गड्ढ़े में तब्दील हो गया है। पौराणिक स्थल को पर्यटन केंद्र के रूप मेें विकसित करने की मांग उठने लगी है।
जनश्रुतियों और भौगोलिक साक्ष्यों के आधार पर वनदेवी धाम महर्षि वाल्मीकि की साधना स्थली रहा है। कहा जाता है कि सीता ने भी अपने अखंड पतिव्रत धर्म का पालन करते हुए यहीं पर लव-कुश को जन्म दिया था। यह स्थान आदि पुरुष वाल्मीकि, मर्यादा पुरुषोत्तम राम तथा माता सीता से जुड़ा हुआ है। यहां पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु पूजन अर्चन करते आते हैं, लेकिन यहां सुविधाओं का अभाव है। जगह जगह पर गंदगी का अंबार लगा है। कूड़ा का निस्तारण नहीं होने से प्लास्टिक के गिलास, फोम थाली, दोना पत्तल, धाम परिसर के चारों तरफ बिखरा रहता है।
वनदेवी धाम का एप्रोच मार्ग जर्जर हाल में है। गिट्टियां इधर उधर बिखरी पड़ी है। मंदिर प्राचीन पोखरे की सीढियां जर्जर होकर जगह-जगह टूट चुकी है। भारी भीड़ होने के बाद भी सार्वजनिक शौचालय न होने से लोगों को परेशानी हो रही। क्षेत्र के संजय सिंह, गिरीश बरनवाल, सर्वजीत यादव, रजापति प्रजापति, तेज बहादुर यादव, रामअवध यादव, आनंद सिंह, हीरा राम का कहना है कि आला अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं किया जा सका है।