मानव जीवन के सारे कष्टों के निवारण में श्री राम नाम कीर्तन और भजन ही कल्याणकारी मंत्र है। श्री राम कथा कोई साधारण वस्तु नहीं है, बल्कि जीवन रूपी नाव का खेवनहार है। जब भक्त समर्पण भाव से भगवान को पुकारता है तो प्रभु उसकी रक्षा के लिए नंगे पांव चले आते हैं। यह बातें ग्रामसभा माफी लाड़नपुर स्थित चेराराम का पूरा में मंगलवार से हो रहे शतचण्डी महायज्ञ के दूसरे दिन बुधवार की शाम गाजीपुर से पधारे कथा वाचक नीरज शास्त्री ने श्रोताओ को संबोधित करते हुए कहा।
उन्होंने कहा कि जब दरबार में खुलेआम द्रोपदी का चीर हरण कौरव पक्ष की तरफ से किया जा रहा था तो उस वक्त भरे दरबार में बैठे बड़े- बड़े योद्धा उनकी लाज बचाने में असहाय नजर आए। इसके बाद द्रोपदी ने भगवान श्रीकृष्ण को भाव भक्ति के साथ पुकारा। जिस पर भगवान पहुंच कर उनकी लाज बचाई। सद्गुरु के माध्यम से ही प्राणी परमात्मा तक पहुंच सकता है। राम कथा के दौरान गुरु के महत्व के बारे में बतलाया और प्रवचन में कहा कि समाज में गुरू का स्थान उच्च व सम्माननीय होता है। गुरू ही एक ऐसा साधन हैं, जो जीवन का मार्ग प्रशस्त करते हैं। बगैर गुरू के ज्ञान कहां, गुरू की शरण में आकर ही हमारा और समाज का उद्धार हो सकता है। हमें गुरू का आदर और सम्मान करते रहना चाहिए और उनके बताए अनुसार ही निर्णय लेना चाहिए। गुरू हर विषम परिस्थितियों में आपका मार्गदर्शक होता है। वहीं भीड़ को देख धर्म के प्रति लोगों में बढ़ती आस्था देखने को मिली। समय समय पर श्रद्धालुओं द्वारा देवी के जयकारो से वातावरण भक्तिमय हो गया। इस दौरान कार्यक्रम के आयोजक जवाहिर तिवारी, विनोद तिवारी, राजेश राय, पीयूष राय, नरेंद्र राय ,धर्मेन्द्र तिवारी, नवीन सिंह, अमित, वीरेंद्र गुप्ता आदि सहित अनेकों रहे।