मऊ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर एक डॉ. अजय कुमार ने नाबालिग दलित किशोरी को बहला फुसलाकर भगाने और उसके साथ दुराचार करने के मामले में आरोपी की जमानत अर्जी को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। एडीजे अपने आदेश में लिखा कि नाबालिग के साथ विवाह धारा 12 बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत शून्य है, तथा धारा नौ के अनुसार दंडनीय अपराध है। पीड़िता 15 सप्ताह की गर्भवती है। म
मामला मधुबन थाना क्षेत्र का है। मामले के अनुसार वादी मुकदमा की 16 वर्षीय भतीजी को बलिया जिले के नगरा थाना क्षेत्र के निवायसी आरोपी संजय राजभर अन्य लोगों के सहयोग से पांच मई 2017 को बहला फुसलाकर भगा ले गया था। इस दौरान नामजद ने किशोरी के साथ दुराचार किया। इस घटना में आरोपित युवक संजय राजभर पुत्र रामकुवंर की तरफ से जमानत के लिए अर्जी दी गई। अर्जी पर बचाव पक्ष से कहा गया कि पीड़िता की उम्र 20 वर्ष है। वह आरोपी के साथ अपनी मर्जी से गई, तथा उसके साथ अपनी मर्जी से विवाह किया। पीड़िता ने अपने अपने बयान में अपनी मर्जी से आरोपी के साथ शारीरिक संबंध बनाए जाने की बात कही है। अर्जी का विरोध करते हुए एडीजीसी फौजदारी शिवदत यादव ने कहा कि नाबालिग के साथ किया गया विवाह शून्य तथा अपराध की श्रेणी में आता है। साथ ही नाबालिग की सहमति विधिक रुप से मान्य नहीं है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा केस डायरी और पीड़िता के बयान का अवलोकन करने के बाद आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दिया।