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एचआईवी, टीबी जैसी घातक बीमारी से जंग लड़ रहे 15 मरीज

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मऊ। जिले में बीते अप्रैल माह से अब तक 15 ऐसे मरीज सामने आए है। जो कि एक साथ दो घातक बीमारियों से जूझ रहे है। एक बीमारी से वो पहले ही जूझ रहे थे, लेकिन इस बीच उन्हें दूसरी बीमारी ने अपने जद में ले लिया। बावजूद उनका हौसला टूटा नहीं हैं वो हर दिन चिकित्सक की सलाह से न सिर्फ इलाज करा रहे हैं। बल्कि सामान्य जिंदगी जीकर परिवार तथा सामाज के सामने जीवटता का मिसाल पेश कर रहे है।
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जिला अस्पताल स्थित एचआईवी मरीजों के इलाज के लिए बना एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते है। वर्ष 2020 के इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल से अब तक एचआईवी तथा टीबी से पीड़ित 15 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। इसमें 11 पुरुष तथा चार महिलाएं शामिल हैं। वहीं बीते वर्ष 2019 में एक वर्ष में दोहरी बीमारियों से ग्रसित मरीजों की संख्या 35 थी। जिसमें 21 पुरुष तथा 14 महिलाएं शामिल थी। इसी तरह से वर्ष 2018 में 29 मरीजों में 20 पुरुष तथा 9 महिलाएं शामिल थी।
एआरटी सेंटर के फार्मासिस्ट शिवेंद्र बहादुर सिंह के मुताबिक इन दोनों बीमारियों से ग्रसित मरीज को ढृढ़ इच्छाशक्ति और अनुशासित जिंदगी जीने की जरूरत होती है। बताया कि दो बीमारियों से पीड़ित होने की जानकारी होने पर ऐसे मरीज पहले तो घबराएं लेकिन सही काउसिलिंग तथा मरीजों के नियमित रूप से सेंटर में आने और चेकअप तथा दवा क सेवन से अब यह मरीज पूरी सकारात्मकता से बीमारियों से जंग लड़ रहे है।
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हौंसला बुलंद, एक बीमारी को जल्द देंगे मात
दोहरी बीमारियों से ग्रसित मरीजों में ऐसे कई मरीज है जो कि अपनी जिदंगी और परिवार का सारी जिम्मेदारियों का फर्ज निभा रहे हैं। वहीं जिला क्षय अधिकारी डॉ. एसपी अग्रवाल ने बताया कि दोहरी बीमारी में शामिल टीबी नियमित इलाज से ठीक हो जाती है। कहा कि अगर किसी मरीज को सामान्य टीबी है तो वह छह माह में दवा के नियमित सेवन से ठीक हो जाएगा। वहीं कोई मरीज एमडीआर की श्रेणी में पहुंच जाता है तो वो नियमित दवा का सेवन करने से 9 से 11 माह में ठीक हो जाएगा। जबकि तीसरे चरण की टीबी एक्सडीआर के मरीज को ठीक होने में 15 से 18 माह का समय लगता है।
मरीजों का किया जा रहा नि:शुल्क इलाज
एचआईवी मरीजों की जांच तथा टीबी की जांच शासन द्वारा नि:शुल्क किया जाता है। एचआईवी पीड़ितों के इलाज की सुविधा जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर में उपलब्ध है। इन मरीजों की पहचान गोपनीय रखी जाती है। टीबी मरीजों के नि:शुल्क उपचार के साथ उन्हें प्रोटिन और विटामिन सेवन कराने के लिए हर माह 500 सों रुपये मरीजों के खाते में डाला जाता है।
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