मऊ। जिले में किसानों के धान की खरीद में क्रय केंद्र प्रभारियों की ओर से मनमानी की जा रही है। क्रय केंद्रों के प्रभारियों द्वारा पइया, गर्दा और नमी के नाम पर 15 प्रतिशत कटौती की जा रही है। किसानों का शोषण किया जा रहा है। क्रय केंद्रों पर नंबर लगाकर किसानों को अपने धान खरीद की प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। लेकिन बिचौलियों के धान खरीद लिए जा रहे हैं। प्रभारियों के इस रवैये से किसानों में आक्रोश है।
जिले में किसानों के धान खरीद करने के लिए 59 क्रय केंद्रों की स्थापना की गई है। इनमें सबसे अधिक पीसीएफ के 36 क्रय केंद्र, मार्केंटिंग के 19, कर्मचारी कल्याण निगम के दो और एग्रो तथा एफसीआई के एक एकक्रय केंद्र हैं। धान खरीद का लक्ष्य 71 हजार कुंतल है। इन सभी केंद्रों से अब तक 19 हजार कुंतल धान खरीदा जा चुका है। किसानों की शिकायत है कि किसान जब धान लेकर क्रय केंद्र पर जा रहा है तो तरह तरह के बहाने बनाकर उन्हें तंग किया जा रहा है।धान में नमी बताकर उसे सुखाकर वापस घर से लाने को कहा जा रहा है। किसान के अनुरोध करने पर उनके धान से 15 फीसदी कटौती की जा रही है। ताजोपुर के किसान शशिकांत सिंह,इमिलियाडीह निवासी रामप्रवेश सिंह कहते हैं कि क्रय केंद्रों पर धान लेकर जाने वाले किसानों को नमी,पइया और गर्दा बताकर तरह तरह से परेशान किया जा रहा है।रतनपुरा गांव निवासी किसान अवधेश सिंह का कहना है कि एक महीने से नंबर लगाए थे।155 नंबर बताया गया। अभी 35 नंबर तक के किसानों का धान खरीदा गया है। किसान नेता पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष राकेश सिंह का कहना है कि 15 प्रतिशत कटौती की जा रही है। किसानों को उनकी फसल में नमी होना, धूल की मात्रा अधिक होने या फिर पइया ज्यादा होने का हवाला दिया जा रहा है। सबसे अधिक शिकायतें साधन सहकारी समितियों के क्रय केंद्रों पर आ रही हैं। हालांकि इस बाबत एआर को आपरेटिव विवेक कौशल कहते हैं कि अनियमितता की शिकायत मिलने पर प्रभारियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
उधर डिप्टी एआरएम दिनेश कुमार तिवारी कहते हैं कि पंजीकृत किसानों से ही धान खरीद की जा रही है। उन्हें के बैंक खातों में धान के रुपये भेजे जा रहे हैं। यदि किसान ही अपने किसान बही कारोबारियों को दे देंगे तो क्रय क्रेंद्र प्रभारी कैसे पहचान पाएगा कि वह किसान है या व्यापारी।