जिला मुख्यालय पर श्री रामलीला मेला समिति की तरफ से विजयदशी पर्व के अवसर पर आयोजित की जाने वाली रामलीला सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है। इसकी खासियत है कि रामलीला का मंचन मंच की बजाय विभिन्न स्थानों पर सजीव किया जाता है।
हजारों साल पूर्व औरंगजेब की बहन और शाहजहां की पुत्री जहाआरा मऊ में रहने के दौरान अपने महल के सामने रामलीला का मंचन कराती थी। रामलीला की खासियत है कि भरत मिलाप के दौरान जयश्री राम और भोर में होने वाली नमाज एक साथ होती है। जितनी देर नमाज होती है, उतनी देर तक जय श्रीराम का उद्घोष होता है। श्री रामलीला मेला समिति के महामंत्री संजय वर्मा ने बताया कि यह प्रक्रिया आदि काल से चली आ रही है। बोले रामलीला मंचन में पुरानी परंपरा का समावेश होने के कारण मंचन और कलाकारों के वेश भूषा में कोई परिवर्तन करना संभव नहीं है।
रामलीला मंचन में इस बार राम का रोल करने वाला अंकुर उपाध्याय बीटेक का छात्र है, जबकि भरत का किरदार ओझा शीतला मंदिर धाम का पुजारी है। संजय वर्मा ने बताया कि आज भी रामलीला में प्रयोग होने वाले टेंट और ध्वनि का सारा काम मुसलमान इकबाल और एक अन्य युवक करता है। भरत मिलाप का कार्यक्रम शाही कटरा मस्जिद के सामने मैदान में संपन्न होता है। कुल मिलाकर संजीव मंचन और अपसी सौहार्द का प्रतीक है जिला मुख्यालय की रामलीला। जिसे हिंदू के साथ-साथ मुसलमान भी देखते है। जिला मुख्यालय की रामलीला आगामी नौ अक्तूबर से शुरू होगी। पहले दिन का मंचन राजगद्दी मैदान में भगवान राम के वनवास से शुरू होगा।