जिले में रोडवेज के बसों की स्थिति बदहाल है। बसें जर्जर तथा प्रतीक्षालय आदि में असुविधाएं बरकरार हैं। कमोबेश जिले की यही हालत है। जबकि गत 18 और 19 जून को आयोजित पुलिस भर्ती परीक्षा में शामिल हुए अभ्यर्थियों से परिवहन विभाग को जबरदस्त आय हुई है। बावजूद इसके रोडवेज परिसर में यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि जिले के मऊ और दोहरीघाट डिपो में बस चालकों की ही कमी है। इससे तीस बसों का संचालन ठप पड़ा है। आजमगढ़ रीजन में कुल सात डिपो के साथ 440 बसें चलती हैं। इसमें मऊ डिपो के पास अकेले 55 बसें हैं। यहां से बसों का संचालन बिहार के छपरा, दिल्ली और लखनऊ के साथ गोरखपुर, सोनौली, वाराणसी सहित अन्य रूटों पर होता है।
गत 4 दिन में राजस्व मिलने और औसतन रोजाना 4 लाख का राजस्व मिलने के बाद भी यहां यात्रियों को विशेष सुविधा उपलब्ध नहीं है। पानी साफ करने का प्लांट भी नहीं है, जिससे यात्रियों को शुद्ध पेयजल मुहैया हो सके। महिलाओं के लिए अलग से न तो प्रतीक्षालय है न उनके बैठने का कोई ठोस इंतजाम। पूछताछ कार्यालय में कुछ कुर्सियां टूटी फूटी पड़ी हैं। डिपो में बसों को खड़ा करने के लिए टिन शेड तक नहीं हैं। बसें खुले में खड़ी की जाती हैं। बरसात में भीगते हुए यात्री बसों में चढ़ते उतरते हैं। बस अड्डा का मैदान बरसात होने पर पानी से भर जाता है। इस बाबत आरएम पीके तिवारी का कहना है कि डिपो का सौंदर्यीकरण और दूसरी सुविधाओं के लिए प्रयास किया जा रहा है। साथ ही चालकों की नियुक्ति की कवायद भी जारी है। जिससे सभी बसों का संचालन हो सके।
इनसेट
आजमगढ़ क्षेत्र को तीन करोड़ की आय
मऊ। पुलिस भर्ती परीक्षा के लिए जिले में 13 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों ने 11 केंद्रों पर परीक्षा दी थी। मऊ डिपो को 18 जून को 8 लाख 86 हजार, जबकि 19 जून को 8 लाख 80 हजार का राजस्व मिला। जबकि आम दिनों में यह आंकड़ा चार लाख तक होता है। इसी क्रम में आजमगढ़ ने 18 को साढ़े 12 लाख और 19 को 16 लाख 66 हजार का राजस्व प्राप्त किया। जबकि बलिया डिपो ने दो दिनों में करीब 22 लाख, अंबेडकर डिपो से करीब 30 लाख, बेल्थरा रोड से करीब 11 लाख, दोहरीघाट से 13 लाख और शाहंगज डिपो से 10 लाख का राजस्व वसूल किया। इसके अलावा 17 जून और 20 जून केे अभ्यर्थियों की भीड़ से लाखों का राजस्व मिला। जिससे चार दिनों में विभाग ने 2 करोड़ 98 लाख का 94 हजार का राजस्व प्राप्त किया। जबकि अन्य दिनों में यह आय डेढ़ करोड़ तक होती है।
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रोकें
विभाग ने तीन दिन में तीन माह के बराबर राजस्व की प्राप्ति की है। विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी आए राजस्व पर यकीन नहीं हो रहा। लेकिन राजस्व बरकरार रहें इसके लिए विभाग व्याप्त खामियों को दूर नहीं कर रहा। उधर इन तीन दिनों में ऐतिहासिक राजस्व मिलने के बाद परिवहन विभाग चालकों की नियुक्ति की कवायद करने के साथ दूसरी समस्याओं को दूर करने की बात कह रहे है। 18 और 19 जून मऊ, आजमगढ़, बलिया सहित कई जिलों में पुलिस जवानों की भर्ती के लिए परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। दो दिवसीय परीक्षा में लाखों की संख्या में अभ्यर्थियों ने अपनी किस्मत अजमाने के लिए परीक्षा दी। अभ्यर्थियों की किस्तम जगेगी या नहीं, इसका फैसला होने में अभी समय लगेगा, लेकिन इन दो दिनों में सुस्त पड़े परिवहन विभाग को ऐतिहासिक कमाई जरुर करा गई। इन दो दिनों में मऊ डिपों को करीब 27 लाख का राजस्व और आजमगढ़ रीजन के सात डिपों से करीब 3 करोड़ का राजस्व मिला। सूत्र बताते हैं कि यह आंकड़ा पांच करोड़ से ऊपर हो सकता था, अगर परिवहन विभाग में संचालित पूरी बसों का संचालन होता।
रोडवेज वाली खबर में जोड़
रोडवेज वाली खबर में इनसेट
यात्री परेशान, डग्गामार वाहनों की कट रही हैं चांदी
मऊ। मऊ डिपो में 55 बसों के लिए 119 चालक और 119 परिचालकों की नियुक्ती होनी चाहिए। लेकिन वर्तमान में केवल 90 चालक और 91 परिचालक है। ऐसे में 29 चालक और 28 परिचालकों की कमी के चलते 55 बसों में 20 बसों का संचालन नहीं हो रहा है। इसके चलते रात के समय रोडवेज पर प्रति दिन मारा मारी की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। गोरखपुर, बलिया, गाजीपुर और मुहम्मदबाद, आजमगढ़ रूट पर कम संख्या में बसों का संचालन हो रहा है। इसी तरह से दोहरीघाट डिपों में 52 बसों में केवल 40 बसों का संचालन हो रहा है। कम बसों के संचालन के चलते जहां यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं, वहीं कई रूट पर निजी वाहन और डग्गामार वाहनों की चांदी कट रही है। बताते चले मऊ रोडवेज पर शाम के समय आटो वाले आजमगढ तक के यात्रियों को बैठाकर उन्हे ले जाते हैं। मजबूरी में यात्री आटो की सेवा लेते है, यात्रियों का मानना है कि मंडल मुख्यालय आजमगढ़ पर आजमगढ़ डिपो के साथ अंबेडकर डिपो है, ऐसे में वहां से लखनऊ या अन्य स्थानों के लिए बस की सुविधा उपलब्ध हो जाती है।
रजनीकांत पांडेय