मधुबन। विकास खंड फतेहपुर मंडाव के अधिकांश गांवों में स्वच्छ भारत अभियान जैसी महत्वाकांक्षी योजना पर पानी फिरता नजर आ रहा है। इस योजना के तहत गांवों में शौचालय निर्माण की प्रगति बहुत धीमी है। इससे सरकार के स्वच्छता मिशन को अधिकारी ही पलीता लगाते नजर आ रहे हैं। वहीं पुराने शौचालयों को दिखाकर भुगतान ले लिया गया है।
विकास खंड में कुल 80 ग्रामसभाएं हैं। दो ग्राम सभाओं का विलय नगर पंचायत क्षेत्र में कर दिया गया। शेष गांवों को शौच मुक्त करने के लिए शौचालय में मिलने वाले धन को 4600 रुपयों से बढ़ाकर 12 हजार रुपये कर दिया। 15 जून को बारिश के पहले इसे पूरा कर लेने का लक्ष्य रखा गया है। जिनके घर पर शौचालय बन भी गया है, उनमें से ऐसे परिवारों के लोग ही उनका उपयोग करते हैं जिनके घर की महिलाएं घर से बाहर नहीं निकलती हैं, ऐसे अधिकांशत: लोग अपने पैसे से शौचालय बनवाए हुए हैं। शेष आज भी शौचालय का पैसा लेकर या तो कम पैसे का रोना रो रहे है या उसका प्रयोग किसी सामान रखने आदि में कर रहे है और शौच खुले में ही कर रहे है।
एक आंकड़े के मुताबिक विकास खंड फतेहपुर मंडाव में वर्ष 2014-15 में 221, वर्ष 2015-16 में 430, वर्ष 2016-17 में 1004, वर्ष 2017-18 में 2750 तो वहीं 2018-19 में 2295 कुल 6700 शौचालयों के लिए धन स्वीकृत किया गया। कई लोगों के पहले ही बनवाए गए शौचालयों के नाम पर धन ले लिया गया। ऐसे ही एक मामले में एक सेक्रेटरी को निलंबित भी किया जा चुका है।
जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु ने चक्की मुसाडोही में चौपाल के दौरान शौचालयों की समीक्षा की तो 136 लोगों को शौचालयों में से केवल 68 शौचालय बने पाए गए। 02 जून 2018 को जिलाधिकारी ने गजियापुर ग्रामसभा में स्वच्छता मिशन की समीक्षा की इस गांव में कुल 59 शौचालयों में अभी तक केवल पांच शौचालय पूरे होने पाए हैं। विकास खंड के रसूलपुर आदमपुर उर्फ रामपुर, ढ़ढवल पटरांव, ढिलई फिरोजपुर आदि जैसे बड़े गांवों का भी है जहां शौचालयों की स्थिति बेहद निराशाजनक है। इस संबंध में सुवेदिता सिंह का कहना है कि मानक के अनुरूप कार्य कराने को सेक्रेटरियों को हिदायत दी गई लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।