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गाजर घास से तबाह हो रहे किसान, चौपट हो रही खेती

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पिपरीडीह। गांव की गलियों, खेतों की मेड़ व नदी नालों के समीप लहलहा रही गाजर घास खेती के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। सैकड़ों हेक्टेअर में फैल चुकी यह घास खेत की उर्वरा शक्ति क्षीण हो रही है। ऐसे में किसानों के लिए परेशानी का सबब बना है। वहीं कृषि वैज्ञानिकों के लिए भी यह किसी चुनौती से कम नहीं है।
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परदहां ब्लाक के पिपरीडीह, भार, फुलवारीया, ओन्हाईच, खरगजेपुर, रैकवारेडीह, पतिला उस्मानपुर, बबुआपुर सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों के खेतों में उगी गाजर घास किसानों के लिए मुसीबत बन चुकी है। इस समस्या के संबंध में कृषि विशेषज्ञ ओपी सिंह का कहना है कि गाजर घास हर मौसम में उगती है। इसके बीज लगातार प्रकाश और अंधकार दोनों ही परिस्थितियों में अंकुरित होते हैं। इसके चलते यह किसी भी भूमि पर उग सकता है। खेतों में लगी गाजर घास न केवल खेती की दुश्मन है, बल्कि इससे मनुष्यों में डरमेटाइटिस, एक्जिमा, एलर्जी, बुखार, दमा आदि बीमारियां भी फैलती है। जबकि इसका पशुओं द्वारा सेवन करने से उनके दुग्ध उत्पादन पर असर पड़ता है। यहीं नहीं जिन खेतों में गाजर खास उगती है उस खेत का फसल उत्पादन भी 20 से 40 प्रतिशत तक कमी आती है। इसका निस्तारण किसान को खेतों में लगी गाजर खास के पौधे में फूल आने से पहले जड़ से उखाड़ने के साथ दवा का छिड़काव करना चाहिए।
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