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धर्मनिरपेक्षता की मूल भावना से हो रहा खिलवाड़

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मऊ। मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन रखे जाने को लेकर जहां भाजपा मुगलकालीन इस नाम को हटाकर अपने आप को गर्वांवित महसूस कर रही है वहीं विपक्षी मुगलसराय के बाद पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर सवाल भी खड़ा कर रहे हैं। उनका कहना है कि भाजपा की सरकार इनके नाम पर कई योजनाएं चला रही है लेकिन एक ही नाम को पूरे देश में हर जगह इस्तेमाल कर भाजपा देश के अन्य महापुरुषों के साथ नाइंसाफी कर रही है। उनका कहना है कि देश के सभी महापुरुषों का सम्मान जरूरी है।
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कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अवनीश कुमार सिंह का कहना है कि मुगलसराय का नाम पंडित दीनदयाय उपाध्याय के बजाए सुभाषचंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद से लेकर कई महापुरुषों के साथ ही वीर अब्दुल हमीद जैसे पूर्वांचल के देशभक्त के नाम पर रखा जा सकता था लेकिन भाजपा की सरकार इतिहास से ही नहीं बल्कि धर्मनिरपेक्षता की मूलभावना से खिलवाड़ कर रही है। सपा जिलाध्यक्ष धर्मप्रकाश यादव का कहना है कि भाजपा की सरकार जनहित के मुद्दों बिजली, पानी, सड़क और अपने विकास के वादों को छोड़कर लोगों का ध्यान बंटाने के लिए इस प्रकार के नामकरण का सहारा ले रही है। बसपा के जिलाध्यक्ष राजीव कुमार का कहना है कि भाजपा की सरकार देश के अन्य महापुरुषों को भी पार्टी और धर्म के नाम पर बांटना चाहती है। भाजपा के जिलाध्यक्ष सुनील कुमार गुप्त का कहना है कि पंडित दीनदयाल के नाम पर मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम रखा जाना देश के लिए गौरव की बात है कि आज हमें मुगलकाल के नाम से आजादी मिली। कहा कि भाजपा किसी भी महापुरुष को नजरअंदाज करके नहीं चल रही है बल्कि सभी का सम्मान करके चल रही है।
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