दोहरीघाट। घाघरा के जलस्तर की रफ्तार बढ़ने का क्रम जारी रहने से तटवर्ती इलाकेे के लोगों की धड़कनें बढ़ती ही जा रही है। भारतमाता मंदिर और शवदाहघाट पर पानी का दबाव बढने से कस्बा सहित तटवर्ती इलाकों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। इसके बाद भी प्रशासन की तरफ से बचाव के उपाय नहीं किए जा सके हैं।
घाघरा का जल स्तर जैसे-जैसे खतरा निशान तरफ बढ़ रहा है। वैसे-वैसे लोगों की धड़कनें बढ़ती ही जा रही है। 24 घंटे में घाघरा का जल स्तर में छह सेमी की बढोत्तरी दर्ज की गई। नदी की प्रचंड लहरें भारत माता माता मंदिर व शवदाह घाट पर सीधे टक्कर मार रही है। ऐतिहासिक धरोहरों के अस्तित्व पर खतरे में पड़ गया है। नदी के रौद्र रुप धारण करने से नगर के मुक्तिधाम, दुर्गा मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला, शाही मस्जिद, डीह बाबा का मंदिर तथा हनुमान मंदिर का अस्तित्व खतरे में है। वही घाघरा के तटवर्ती इलाकों धनौली रामपुर, नई बाजार, नवली, चिऊंटीडाड़, बहादुरपुर, सरया पतनई, गोधनी, बीबीपुर, ठाकुर गांव, जमीरा, चौराडीह, पाउस, कोरौली, बेेलौली, ठिकरहिया, चंद्राबारी, महुआबारी, रसूलपुर, सूरजपुर आदि गांवों के सिवानों मे पानी पहुंचने के डर से फसलों के डूब जाने की चिंता सताने लगी हैं।
नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो बुधवार को 69.38 मीटर रहा। जबकि मंगलवार को 69.36 मीटर रहा। जबकि गौरीशंकर घाट पर खतरे का निशान 69.90 मीटर है। उधर घाघरा के जलस्तर में वृद्धि का क्रम जारी रहने से सूरजपुर क्षेत्र के आश्रम बस्ती की तरफ पानी का दबाव बढ़ गया है। नदी आश्रम बस्ती के उपजाऊं भूमि की तरफ तेजी से बढ़ रही है। कटान शुरू हो जाने से तटवर्ती इलाकों के लोगों की नींद उड़ गई है। लेकिन सिचाई विभाग विभाग के अधिकारी उदासीनता बरत रहे हैं।