जिले में गेहूं खरीद का हाल काफी बुरा है। लक्ष्य प्राप्ति तो काफी दूर आधा भी हो पाना काफी मुश्किल लग रहा है। जिन किसानों को गेहूं बेंचना था वे तो बेंच चुके हैं। अब तक सरकारी खरीद महज 13 प्रतिशत ही हो पाई है। इसकी वजह यह है कि इस वर्ष गेहूं के उत्पादन में 50 से लेकर 70 प्रतिशत तक कमी आ गई है। अधिकांश किसानों के पास उतना ही गेहूं हो पाया है जिससे उनके परिवार का काम साल भर चल सके।
जिले के लिए गेहूं खरीद का लक्ष्य इस वर्ष 42 हजार मीट्रिक टन रखा गया है। गेहूं खरीद के लिए लिए कुल 35 खरीद केंद्र बनाए गए हैं। गेहूं खरीद की धीमी गति को देखते हुए डीएम ने घर-घर जाकर किसानों से गेहूं खरीदने के निर्देश दिए। खरीद के लिए जिम्मेदार कर्मचारी वाहन लेकर गांवों में जा भी रहे हैं। लेकिन किसानों के पास बेंचने को गेहूं हो तब तो खरीद एजेंसियों को दें। किसान नेता राकेश सिंह तर्क देते हैं कि इस वर्ष सर्दी के मौसम में काफी कम ठंड पड़ी। गेहूं के पौधों के विकास के लिए दिसंबर और जनवरी के महीनों में ठंड जरूरी होती है । लेकिन जिले में इस वर्ष काफी कम ठंड पड़ी और अप्रैल महीने के शुरुआती दिनों में ही अचानक मौसम शुष्क हो गया।
बरसात के सीजन में पड़े भीषण सूखे की वजह से भूगर्भ जलस्तर काफी नीचे चले जाने से नलकूप बेकार हो गये। गेहूं की फसलों की भरपूर सिंचाई नहीं हो पाई। इसके चलते गेहूं की फसल समय से काफी पहले ही सूख गई और गेहूं के दाने पतले हो गए। इससे 50 से 70 प्रतिशत गेहूं का उत्पादन कम हो गया। जिला खाद्य एवं विणन अधिकारी नरेंद्र तिवारी कहते हैं कि गेहूं खरीद का प्रयास किया जा रहा है लेकिन किसान गेहूं बेंचने में रुचि नहीं ले रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी बीके सिंह का कहना है कि इस वर्ष दिसंबर , जनवरी और फरवरी महीनों में अपेक्षाकृत कम ठंड पड़ी है और अप्रैल के पहले सप्ताह से ठंड में काफी कमी आ गई। तेज पछ़ुवा हवा चलने से गेहूं की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। इन परिस्थितियों में गेहूं का उत्पादन अपेक्षाकृत प्रभावित हुआ है।