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नहीं आ रहा नहरों में पानी , सूखने लगी फसल

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मऊ/रतनपुरा। क्षेत्र की नहरों और कुलाबा में पानी न आने से गेहूं की फसल सूखने लगी हैं। किसान निजी डीजल इंजन से चलने वाले नलकूपों से फसलों की सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन इससे उनकी जेब पर अधिक बोझ पड़ रहा है। अगर सही समय पर फसल की सिंचाई न की गई तो उत्पादन घटना तय है। क्षेत्र में बड़े पैमाने पर गेहूं की बुआई की जाती है।
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गेहूं की फसल की बुआई 15 नवंबर से शुरू हो जाती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं की फसल में बुआई के 21 दिन के बाद सिंचाई करनी होती है। अब गेहूं की फसल एक माह से भी अधिक की हो चुकी है, लेकिन नहरों में पानी न होने से किसान फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। इससे फसलें सूख रही हैं। किसान इस बात का भी विरोध कर रहे हैं कि आखिर समय से नहरों व रजबहा की सफाई क्यों नहीं कराई गई। क्षेत्र के सोनराईच, पारा मुबारकपुर, लाडनपुर, लेरो, कटवास, चेरुइया, भेलाबाध, कन्यारिपुर, जयरामगढ़ सहित अनेकों गांव के किसान अपने खेतों की सिंचाई के लिए परेशान है।
वहीं, शारदा सहायक खंड 32 नहर में पानी नहीं आने पर क्षेत्र के किसान सुजीत कुमार, महातम सिंह, मुमताज अहमद, राम बडाई सिंह,बशीर अंसारी, संतू सिंह संतोष कुमार, राजेश कुमार, देवेंद्र सिंह का कहना है कि किसानों की जरूरत के समय नहर में पानी न छोड़े जाने से खेती भगवान भरोसे हो रही है। इस बाबत अधिशासी अभियंता वीरेंद्र सरोज काक हना है कि शारदा सहायक का संचालन गोरखपुर से होता है। इसमें पानी आगे से ही नहीं आ रहा है।
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निजी संसाधनों से बढ़ जाती है लागत
किसानों के लिए निजी संसाधनों से गेहूं की फसल की सिंचाई करना आसान नहीं है। एक ओर जहां संसाधनों की कमी आड़े आती है तो वहीं दूसरी ओर खर्च भी बढ़ जाता है। एक बीघा गेहूं की फसल की सिंचाई करने में लगभग चार सौ रुपये का खर्च आ जाता है। ऐसे में किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
नहरों की नहीं होती नियमित सफाई
किसानों की बात क्षेत्र के गोपाल, भागीरथ, महेश, बलदेव, सुभाष आदि किसानों का कहना है कि हर बार गेहूं की फसल से पहले ही नहरों की सफाई होती है तो इसमें लापरवाही क्यों की जाती है। समय रहते अगर सफाई हो जाए तो किसानों को परेशानी न हो। किसानों के हित को ध्यान में रखकर सरकारी विभागों द्वारा कार्य नहीं किया जाता है। दो माह से नहरों में पानी नहीं है, ऐसे में अब तो नहरों में पानी छोड़ा जाना चाहिए।
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