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अभियान बेअसर: नहीं रुक रहा डग्गामार वाहनों का संचालन

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जिले में डग्गामार वाहनों का संचालन रुक नहीं पा रहा है। कई रूटों पर बेधड़क चल रहे डग्गामार वाहनों के चलते दुर्घटना का ग्राफ बढ़ता जा रहा। कार्रवाई के बाद भी प्रशासन इस पर रोक नहीं लगा पा रहा।
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आरटीओ दफ्तर में छोटे से लेकर बड़े वाहनों के रुप में दो हजार सवारी वाहन पंजीकृत है। इसमें सबसे ज्यादा आटो का पंजीकरण है, जबकि बस और अन्य वाहन कम है। मजेदार बात यह है कि सवारी में पंजीकृत वाहनों का परमीट मात्र पंद्रह किमी की परीधि के लिए जारी होता है, लेकिन वो नियम को तोड़ विभागीय अधिकारियों से मिलकर सुबह अपने क्षेत्र से सवारी लेकर मुख्यालय पहुंच जाते है।
लगातार डग्गामार वाहनों के चलते बड़े दुर्घटनाओं को देखते हुए बीते चार माह में पुलिस अधीक्षक ललित कुमार और एएसपी शिवाजी शुक्ल द्वारा तीन बार ट्रांसपोर्टरों के साथ वाहन चालकों की बैठक आयोजित कर चुके है। बैठक में पुलिस अधिकारियों द्वारा मैजिक, बस और आटो चालकों को अपने वाहनों का रजिस्ट्रेशन कराने के साथ सत्यापन कराने और अनफिट वाहन न चलाने की समझा चुके है। इसके बावजूद जिले के मऊ- रानीपुर , मऊ - इटौरा, घोसी - जीयनपुर, घोसी - मधुबन, अमिला-लाटघाट, रतनपुरा- भीमपुरा, हलधरपुर-बेलौझा रूट डग्गामार वाहन संचालित हो रहे है।
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इस बावत एएसपी शिवाजी शुक्ला का कहना है कि डग्गामार वाहनों पर 1 मई से 15 मई तक अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है। वहीं प्रभारी आरटीओ रामसिंह यादव का कहना है कि साल के शुरूवाती चार माह में विभाग द्वारा चार डग्गामार बस, 17 ओवरलोड वाहन सहित 78 बाइक सवारों पर कार्रवाई कर चुके है। जबकि बीते साल में 100 से ज्यादा डग्गामार वाहनों सहित 220 गाड़ियों पर कार्रवाई की गई थी।
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